हिन्दी दिवस के माध्यम से बच्चों ने जाना भाषा में निहित संस्कृति एवं संस्कार

September 27, 2017

हिन्दी भारत की राष्ट्रीय भाषा है । यह भारत के बहुसंख्यक लोगों की भाषा है। पर आज ऐसा प्रतीत होता है कि हिन्दी लोगों के मनों से अपनी महत्ता को खोती जा रही है। सभी भाषाओं की जननी 'संस्कृत भाषा’ से उत्पन्न व उसके समीपस्थ हिन्दी भाषा का स्थान आज अंग्रेजी भाषा द्वारा लिया जा रहा है| उपहास में तो आज लोग यहाँ तक कह देते हैं कि हिन्दी भाषा का स्मरण हर वर्ष मात्र हिन्दी दिवस यानी 14 सितम्बर को ही किया जाता है ।

इसके बावजूद मंथन - ' संपूर्ण विकास केन्द्र ' विविध प्रायोगिक क्रियाकलापों द्वारा, हिंदी दिवस के माध्यम से बच्चों में संस्कृति एवं संस्कार जागृत करने हेतु प्रयासरत है ताकि आज की पीढ़ी में भी मातृ भाषा के प्रति चेतना जाग्रत की जा सके। मंथन केन्द्रों पर नियमित रूप से हिन्दी की कक्षाएं भी चलाई जाती हैं और इन क्रन्द्रों में हिन्दी और अंग्रेजी को सामान रूप से महत्त्व दिया जाता है। इसी क्रम में मंथन प्रकल्प के तहत इस वर्ष 16 सितम्बर 2017 को बड़े ही उत्साह और जागरुकता के साथ हिन्दी दिवस मनाया गया। 'गोपाल नगर', लुधियाना, पंजाब में स्थित सम्पूर्ण विकास केंद्र में विविध रोचक गतिविधियों द्वारा हिन्दी के महत्व को उजागर किया गया। इस कार्यक्रम में गणमान्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, लुधियाना के प्रभारी श्री जतीन्द्र जी, मंथन लुधियाना के प्रभारी श्री तरसेम सिंह जी एवं दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, लुधियाना शाखा से साध्वी रजनी भारती जी भी उपस्थित रहे। मंथन के 100 से भी अधिक छात्र इस उत्सव का हिस्सा बने। श्री जतीन्द्र जी ने अपने हृदयस्पर्शी ओजस्वी भाषण द्वारा हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डाला और मंथन  द्वारा आयोजित इस प्रकार की गतिविधियों की भी सराहना की। ‘मंथन' के अन्य केन्द्रों:- दिल्ली व एन॰ सी॰आर॰, पंजाब तथा बिहार में भी विविध गतिविधियों द्वारा इस दिवस को बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। बच्चों को हिन्दी में संख्या व गणना, हिन्दी-महीनों के नाम व ऋतुओं के नाम भी सिखाए गये। इस मौके पर बच्चों की प्रतिभा व उत्साह संवर्धन हेतु निबंध लेखन प्रतियोगिता, स्वरचित कविता पाठ, कथा कहानी कहो अपनी ज़ुबानी इत्यादि प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।                             

इसके अतिरिक्त मंथन के बच्चों तथा शिक्षकों द्वारा शुद्ध हिन्दी में संवाद स्थापित करने का प्रयास भी किया गया। बच्चों ने फ़्लैश कार्ड आदि रुचिकर माध्यमों द्वारा शुद्ध उच्चारण व नए शब्द सीखे जिससे उनके शब्दभण्डार में वृधि हुई। हम मंथन प्रकल्प के प्रेरणा-स्त्रोत परम पूजनीय गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी का अन्तर्मन से धन्यवाद करते हैं जिनकी प्रेरणा से हमें नई पीढ़ी में संस्कार एवं संस्कृति की संचेतना जाग्रत करने का सुवसर प्राप्त हुआ है।