Akhand Gyan

हे अंतर्यामी आशुतोष! आपको शत-शत नमन!

तुझसे भला क्या छिप पाएगा, तुम तो अंतर्यामी हो, बिन माँगे सब देने वाले, तुम तो प्रभु महादानी हो। अपनापन तेरे जैसा क...

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परदेसी हृदयों में गुरु भक्ति की गूंँज!

तुम्हारे गुरु का ओहदा क्या है? कहा जात…

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ईश्वर अपने साथ है तो डरने की क्या बात है?

‘वीर एक बार मरता है, परन्तु डरपोक बार-…

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तनाव युक्त से मुक्त जीवन की ओर...

अभी पिछले कुछ महीनों से कोरोना वायरस स…

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हम चेतेंगे या समाप्त होंगे?

8 जुलाई 2004! दैनिक जागरण समाचार पत्र के द…

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प्रकृति का रौद्र तांडव कैसे थमेगा?

कोरोना महामारी के चलते ...इस लेख के अंतर…

Akhand Gyan

रामचरितमानस के पात्रों से सीखें---

अमरीकी लेखक जॉन मैक्सवेल कहते हैं- 'A wi…

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अकेलापन या एकांत!

एक बार एक जंगल में भीषण आग फैल गई। उस आग…

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उफ! ये खर्राटे…

पाठकों! हमने लोगों को टी.बी., शुगर और था…

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सितारे जो टूटते नहीं!

कुछ सितारे आकाश में जगमग कर अंधेरे से …

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