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साधकों के भीतर आध्यात्मिक जागृति और सम्पूर्ण स्वास्थ्य लाभ को बढ़ावा देने हेतु, गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक व संचालक, डी.जे.जे.एस) के दिव्य मार्गदर्शन में 'दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान' द्वारा 30 से 31 मार्च 2024 तक नूरमहल, पंजाब में एक विलक्षण ध्यान शिविर का आयोजन किया गया। साधकों को शारीरिक एवं आत्मिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन प्रदान करना इस सामूहिक ध्यान शिविर का परम उद्देश्य था,  ताकि एक साधक स्वयं के भीतर उतर अपने आध्यात्मिक विकास की यात्रा शुरू करने के लिए प्रेरित हो सके।

Meditation Camp organized by DJJS illuminated the souls on the path to tranquillity at Nurmahal, Punjab

इस शिविर का शुभारम्भ ईश्वर के चरण-कमलों में प्रार्थनाओं के श्रद्धा-पुष्प अर्पित करते हुए किया गया। डी.जे.जे.एस प्रतिनिधियों और गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य स्वामी चिन्मयानंद जी और शिष्या साध्वी रूपेश्वरी भारती जी ने समझाया कि कैसे ध्यान की आलौकिक शक्ति एक शिष्य को उसके सतगुरु के साथ आन्तरिक रूप से जोड़ने में सहायक है। इस ध्यान शिविर में सामूहिक ध्यान सत्र आयोजित किए गए जहाँ प्रतिभागियों ने शुद्धता और शांति की भावना का अनुभव करते हुए स्वयं को दिव्य ऊर्जा में आकंठ डूबा पाया।

डी.जे.जे.एस प्रतिनिधियों ने निरंतर आध्यात्मिक उन्नति के लिए ध्यान को अपने दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बनाने पर जोर दिया| ध्यान के महत्व को समझाते हुए उन्होंने बताया कि यह सर्व विदित है कि 'ब्रह्मज्ञान' आधारित ध्यान से ही आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक परिवर्तन संभव है। ध्यान एक साधक को आत्म-चिंतन और आत्म-निरीक्षण करने के लिए सदैव प्रोत्साहित करता रहता है, जिससे एक साधक के विचारों और व्यवहार को सदा सही दिशा ही प्राप्त होती रहती है। यह विकसित आत्म-जागृति व्यक्तिगत विकास, आत्म-खोज और जीवन के वास्तविक लक्ष्य की गहरी समझ प्रदान करती है। साध्वी जी ने आनंदपूर्वक इस बात पर भी बल दिया कि एक शिष्य जब चेतना की गहराई में उतरकर अपने भीतर उस दिव्यता का अनुभव करता है तब ध्यान की यह प्रक्रिया ही गुरु-शिष्य के बीच एक दिव्य डोर के रूप में कार्य करती है।

Meditation Camp organized by DJJS illuminated the souls on the path to tranquillity at Nurmahal, Punjab

दो दिवसीय ध्यान शिविर ने सभी प्रतिभागियों के लिए एक परिवर्तनकारी यात्रा के रूप में कार्य किया। इससे वे आत्मिक उत्थान और परमात्मा के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित करने में ध्यान की भूमिका को गहराई से समझ पाए। शिविर के समापन पर, सभी साधक आध्यात्म पूरित जीवन जीने की गूढ़ शिक्षाओं और अनुभवों को अपने साथ संजो कर ले गए।

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