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पंजाब, नूरमहल आश्रम में 9 अक्टूबर को विशाल सत्संग कार्यक्रम व सामूहिक भंडारे का आयोजन रहा| जिसमें भारी संख्या में गुरु भक्तों की तादात देखी गई| अनेक विशिष्ट अतिथियों की प्रस्तुति दर्ज़ करते इस कार्यक्रम में श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य व शिष्याओं ने उत्साहपूर्ण भजन-संकीर्तन द्वारा भक्ति पथ पर निरंतर बढ़ते रहने की अलख जगाई| साध्वी जीवेश्वरी भारती जी व स्वामी नरेन्द्रानंद जी ने विचारों के माध्यम से गुरुदेव के बहुत से दिव्य वचनों का स्मरण करवाते हुए- ‘विश्व शांति स्थापना’- लक्ष्य का भी गुरुभक्तों को स्मरण करवाया| साध्वी जी ने कहा- भक्ति मार्ग पर बढ़ते हुए कठिनाइयों का आना ही, उसकी सत्यता का प्रमाण है| कोई भी परिस्थिति सिर्फ भक्त के धैर्य और पुख्ता हौंसलों को आजमाने आती है| साधना की ढाल से शिष्य पूरी तरह सुरक्षित रहकर इस मार्ग पर निष्ठा से निरंतर चल सकता है| जरूरत है- सिर्फ बिना रुके आगे बढ़ते जाने की| स्वामी जी ने भी उपस्थित साधकों से नवयुग आगमन के लिए स्वयं को तैयार करने की बात कही| साथ ही उन्होंने बताया कि गुरु के मिशन के लिए सर्वस्व अर्पित कर कोई भी गुरु की प्रसन्नता व आशीर्वाद की प्राप्ति सहज ही कर सकता है| इन विचारों से सभी ने और खासकर युवाओं ने अपने भीतर एक नई ऊर्जा का संचार पाया| कार्यक्रम के अंत में सामूहिक साधना से दिव्य तरंगों का प्रसार व विश्व शांति की मंगलकामना हर ओर प्रखर हुई|

Monthly Spiritual Congregation, Paved the Path of Inner Light to Enlightenment at Nurmahal Ashram, Punjab

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