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अपने सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम ‘आरोग्य’ के तहत, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की बेंगलुरू शाखा ने एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशाला-'सर्वे सन्तु निरामया' का आयोजन  20 मई 2018 को सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक स्नेह द्वीपसमूह, गुंटुपल्ली, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में किया गया । इस कार्यशाला की सम्पूर्ण रुपरेखा और निष्पादन संस्थान के प्रचारकों द्वारा किया गया| इसका उद्देश्य मुख्य रूप से स्वस्थ और समन्वित जीवन के लिए आयुर्वेद, योग और संतुलित भोजन पर जागरूक करना था, जिसे संवादात्मक और समूह चर्चाओं, प्रश्नोतरी, प्रेरणादायक विचार सत्र और पावर प्वाइंट प्रस्तुतियों के साथ अच्छी तरह से व्यक्त किया गया|

कार्यशाला की शुरुआत ‘ॐ’ के उच्चारण और पर्यावरण व मस्तिष्क पर इसके लाभों के स्पष्टीकरण के साथ हुई। स्वामी प्रदीपानंद जी ने योग और प्राणायाम सत्र के दोरान प्रतिभागियों को बहुत ही सरल तरीके से योगसन और प्राणायाम तकनीकों को सिखाया। पद्मासन, वज्रासन, सूर्यनमस्कर, ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, चक्रासन, शीर्षासन और स्वास्तिकासन, भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम, कपालभाती, भ्रामरी, जलंधर बंध, उडियान बंध, मूल बंध, इत्यादि योगासनों को शामिल किया गया। सत्र में स्वामी जी ने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण हेतु योगासन, प्राणायाम और ध्यान के लाभों के बारे में उल्लेख किया  ।

साध्वी निशंका भारती जी ने आयुर्वेद के बारे में परिचय देते हुए आयुर्वेद के गूढ़ तथ्यों को सभी के समक्ष रखा| उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ और समग्र जीवन शैली को बनाए रखने के लिए उचित और संतुलित आहार आधारशिला है| "हम जैसा खाते हैं, हम वैसे ही बन जाते हैं" और जो कुछ भी हम खाते हैं वह न केवल हमारे आंतरिक अस्तित्व का हिस्सा बनता है, बल्कि हमारे शरीर का भी निर्माण करता है। इसी के चलते, एक संवादात्मक सत्र में, प्रतिभागियों ने समग्र स्वास्थ्य के लिए विकल्प के रूप में शाकाहारी भोजन पर चर्चा की| विभिन्न उदाहरणों को प्रस्तुत करते हुए साध्वी जी ने अच्छे स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक विचारों को बरकरार रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया| मन किसी भी बीमारी के कारण और इलाज में एक बहुत ही शक्तिशाली उपकरण है और इसलिए नैतिक मूल्यों के मानसिक अनुशासन और अनुपालन को स्वास्थ्य के लिए सबसे पहले आवश्यक माना जाता है| इसके लिए हर रोज ‘प्रार्थना और ध्यान’ एक महत्वपूर्ण सहायक प्रणाली है।

अंत में सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक ध्यान किया गया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला के बाद अपने अनुभव भी साझा किए। लगभग 25 लोगों ने इस कार्यशाला के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम का अंत, सामूहिक प्रार्थना से हुआ- “सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे संतु निराम्याः। सर्वे भद्रानी पश्यन्तु। मा-कश्चिद्दुःखभाग्भवेत। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।“
 

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