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कथाओं की श्रृंखला में अनाज मंडी, गाँव लाखे वाली मंडी, जिला श्री मुक्तसर साहिब, पंजाब में 7 मार्च से 10 मार्च तक शिव कथा का आयोजन किया गया| कथा का शुभारम्भ ब्रह्मज्ञानी वेद- पाठियों द्वारा मंत्र उच्चारण से हुआ| कथा का वाचन सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी गरिमा भारती जी ने किया| साध्वी जी ने अपने प्रेरणादायक विचारों से भगवन शिव के अनेक अवतारों की कथा के मर्म को उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष रखा| शिव विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए साध्वी जी ने बताया कि माँ पार्वती ने मुनि नारद की आज्ञानुसार शिव प्राप्ति हेतु घोर तप किया| तदुपरान्त वह भगवान शिव को प्राप्त कर पायी| उन्होंने बताया कि एक जीवात्मा यदि ईश्वर को पाना चाहती है तो सबसे पहले उसे मुनि नारद के समान सतगुरु की आवश्यकता है| जब तब एक जीवात्मा के जीवन में नारद जैसे गुरु का पदार्पण नहीं होता तब तक वह ईश्वर को प्राप्त करने का मार्ग नहीं जान सकती| हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जीवन में पूर्ण गुरु ही हमारे घट में ईश्वर का साक्षात्कार करवा वास्तविक भक्ति का आरम्भ करवाते है| मंचासीन संत समाज ने भगवान् शिव की महिमा में सुमधुर भजनों का गायन किया| साध्वी गरिमा भारती जी ने कथा के सामाजिक पक्ष पर भी प्रकाश डालते हुए लोगों को नशे से दूर रहने की अपील की| साथ ही, उन्होंने संस्थान द्वारा सामजिक उत्थान हेतु चलाए जा रहे कार्यकर्मों जैसे पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम- संरक्षण, लिंग समानता कार्यक्रम- संतुलन, नशा  उन्मूलन कार्यक्रम- बोध, भारतीय गौ संरक्षण व् संवर्धन कार्यक्रम- कामधेनु व सम्पूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रम- आरोग्य आदि के विषय में लोगों को विस्तृत जानकारी प्रदान की| कार्यक्रम के अंत में अनेक श्रद्धालुओं ने ब्रह्मज्ञान द्वारा ईश्वर साक्षात्कार का लाभ पाया|

Shiv Katha at Muktsar, Punjab by Sadhvi Garima Bharti Ji Divulged the Relevance of the Third Eye

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