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16 नवम्बर से 20 नवम्बर तक राम प्रेस, फाजिल्का, पंजाब में शिव कथा आयोजित की गई| पांच दिवसीय इस कथा के माध्यम से भक्तों ने भगवान शिव के अलंकारों, लीलाओं व संदेशों में निहित वास्तविक अर्थ को जाना| सुमधुर भक्ति रचनाओं और संदेशप्रद उत्सवों ने जहाँ हर्षाया तो वहीँ जीवन की सच्चाई से भी रूबरू करवाया| कथा व्यास साध्वी गरिमा भारती जी ने शिव विवाह में छिपी आध्यात्मिकता को उजागर करते हुए बताया कि यह कोई साधारण विवाह नहीं है| भगवान शिव का माता पार्वती के संग विवाह प्रसंग मात्र मनोरंजन के लिए नहीं है| ये विवाह आध्यात्मिक दृष्टि से शिव का शक्ति से मिलन है| माता पार्वती जीवात्मा का प्रतीक है और भगवान शिव परमात्मा हैं| प्रत्येक जीवात्मा परमात्मा से मिलने के लिए व्याकुल है| भगवन को पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयासरत है| लेकिन हमारे धर्मग्रन्थ कहते हैं कि बिना गुरु के किसी को भी भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती| भगवान शिव का माता पार्वती से मिलन महर्षि नारदजी के द्वारा संभव हो पाया| नारद जी गुरु की भूमिका को निभाते हैं|गुरु आवश्कता पर प्रकाश डालते हुए साध्वी जी ने बताया की भगवान शिव स्कन्द पुराण में कहते हैं कि चाहे आप मेरी पूजा कर लें या किसी अन्य देवी-देवता की, जब तक गुरु की शरण में जाकर ईश्वर की अनुभूति करवाने वाला तत्व ज्ञान प्राप्त नहीं करते, तब तक प्रभु की प्राप्ति नहीं होगी| इसलिए विवाह उत्सव में झूमते हुए कुछ पल के लिए जिस ख़ुशी को पाया उसे सदा के लिए एक गुरु की शरणागत होकर पाएँ|

Shiv Katha: Reveling in the Grace of the Auspicious One

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