श्रीराम कथामृत से शिमला, हिमाचल प्रदेश निवासियों पर बिखरी ज्ञान की आनंदमय किरणें

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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने शिमला, हिमाचल प्रदेश में 26 मई से 1 जून 2018 तक सात दिवसीय श्री राम कथामृत का भव्य एवं विशाल कार्यक्रम किया। श्री आशुतोष महाराज जी की समर्पित शिष्या कथाव्यास प्रज्ञाचक्षु साध्वी शची भारती जी ने कार्यक्रम के दौरान श्रीराम चरित्र से सम्बन्धित अनेक आध्यात्मिक पहलु प्रस्तुत किए।

दिव्यता और आध्यात्मिकता के प्रतीक भगवान श्रीराम ने जीवन भर धर्म के मार्ग का पालन किया और दुनिया के सामने एक उदाहरण स्थापित किया। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि हनुमान, भरत, केवट, शबरी जैसे भक्तों की एकनिष्ठ भक्ति और दृढ़ विश्वास के बिना क्या सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करना संभव था! हालांकि सर्वव्यापी ईश्वर ही सदैव सर्वोच्च उद्देश्य के लिए पृथ्वी पर आते हैं और उसे संभव बनाते हैं। लेकिन भगवान राम ने न केवल अपने सर्वोच्च उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि उन्होंने सामान्य लोगों को दिव्य ब्रह्मज्ञान प्रदान कर दैवीय गुणों से सम्पन्न भी किया।

प्रार्थना से कार्यक्रम शुरू किया गया। दिव्य आध्यात्मिक संदेशों को प्रसारित करने वाले भजनों की श्रृंखला ने दर्शकों को ईश्वरीय आशीर्वाद स्वरुप भक्तिमय वातावरण व सकारात्मक तरंगों से ओत-प्रोत कर दिया।  यह आयोजन संस्थान द्वारा नेत्रहीन व विकलांग वर्ग की सहायतार्थ चलाए जा रहे सामाजिक प्रकल्प- ‘अंतर्दृष्टि’ को समर्पित  था।  जो इस वर्ग के अनेक लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का एक अभियान है। शारीरिक स्तर पर अपूर्ण लोगों के लिए कार्य करते हुए अंतर्दृष्टि ने इस अनूठी पहल के माध्यम से अलग-अलग तरीके से सेवा करके अद्भुत व सराहनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। मंच पर उपस्थित सभी संगीतकार यूँ तो बाहरी तौर पर नेत्रहीन थे, लेकिन पूर्ण सतगुरु श्री आशुतोष महाराज जी की कृपा द्वारा उनकी आत्मा आध्यात्मिक रूप से जागृत है। जिसने सभी दर्शकों को अपने अंदर की दिव्य-दुनिया का अनुभव करने के लिए दिव्य नेत्र को सक्रिय करने की दिशा में मार्गदर्शन किया।

साध्वी शची भारती जी ने दिव्य ज्ञान पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि स्वयं की दिव्य अनुभूति पाना और हर क्षण उससे जुड़ने रहना हम सबका जन्मसिद्ध अधिकार है। इस तरह के दिव्य सम्बन्ध की ही आज के व्यस्त संसारिक जीवन में कमी देखने को मिलती है।  जहां हर ओर अशांति, स्वास्थ्य समस्याएं और रिश्ते में बढ़ती दरारें पहले से ही हमारे जीवन को अस्त-व्यस्त किए हुए हैं। हम आध्यात्मिकता और जीवन के सर्वोच्च उद्देश्य से बहुत दूर हैं। हम सभी को कहां जाना चाहिए, साध्वी ने समाधान प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को इससे भी परिचित करवाया।   

जीवन की सत्यता जानने और समझने के बाद लोग बहुत उत्साहित नज़र आए। उन्होंने सभी आयोजकों और संस्थान के स्वयंसेवकों को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया।

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