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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य कृपा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डी.जे.जे.एस) द्वारा 16 से 22 सितंबर 2024 तकपानीपत, हरियाणा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा का उद्देश्य 'दिव्य-ज्ञान' की तकनीक के माध्यम सेअपने भीतर भगवान श्री कृष्ण का साक्षात दर्शन कर, सच्ची भक्ति से जुड़ने के सर्वोच्च आध्यात्मिक विज्ञान को प्रकट करना और धार्मिकताके दिव्य मार्ग को प्रदान करना रहा। धरा पर धर्म की स्थापना करने हेतु और अपनी दिव्य कृपा बरसाने के लिए ही भगवान समय-समय परअवतार लेते हैं और मानव को अज्ञानता एवं भौतिकता की गहरी नींद से जगाने आते हैं। इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों कोआमंत्रित किया गया, उनमें से हजारों ने अपनी बहुमूल्य उपस्थिति दर्ज की और शाश्वत आनंद को प्राप्त किया।

Shrimad Bhagwat Katha manifested the Inner-Divine Connection with Lord Krishna in Panipat, Haryana

कथा व्यास साध्वी वैष्णवी भारती जी ने श्रद्धालुओं के समक्ष भगवान का दर्शन करने और ईश्वर के साथ शाश्वत बंधन स्थापित करने के अपनेदिव्य संदेश को खूबसूरती से व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जीवन का एकमात्र और अंतिम उद्देश्य आंतरिक एवं आध्यात्मिक विकास परध्यान केंद्रित करते हुए ईश्वर को प्राप्त करना है। आज के समय में भी श्रीमद्भागवत कथा अत्यधिक प्रासंगिक है- इस बात पर भी बल दिया गया। 

यह विश्वासपूर्वक दावा किया गया था कि यदि कोई शिष्य अर्जुन की तरह भ्रम, शून्यता, अकेलापन और दिशाहीन भटकने की स्थिति काअनुभव करता है, तो केवल और केवल भगवान श्री कृष्ण जैसे पूर्ण आध्यात्मिक गुरु ही दिव्य मार्गदर्शन प्रदान कर सत्य को प्रकट कर सकतेहैं एवं शिष्य को शाश्वत विजय की ओर ले जाने की निपुणता रखते है। भगवान श्री कृष्ण की भांति पूर्ण गुरु ही अपने शिष्य को 'दिव्य-ज्ञान' प्रदान किया करते हैं। जैसा कि शास्त्रों में बताया गया है कि जब अर्जुन की तीसरी आंख सक्रिय हुई, तो उन्हें अपने भीतर दिव्य अनुभवों कीएक श्रृंखला का अनुभव हुआ, अपने कई संदेहों का समाधान मिला एवं उन्होंने आत्म-साक्षात्कार का अनुभव किया। यह केवल उसी समय ही नहीं घटा बल्कि आज के समय में भी यह संभव है। 

Shrimad Bhagwat Katha manifested the Inner-Divine Connection with Lord Krishna in Panipat, Haryana

आज, गुरूदेव श्री आशुतोष महाराज जी भी इसी 'दिव्य-ज्ञान' की आध्यात्मिक तकनीक का प्रसार कर रहे हैं, जो घटभीतर ईश्वर को देखने कीएकमात्र विधि है। उनकी कृपा से आज लाखों भक्त जागृत हैं, वे प्रतिदिन भगवान के दर्शन कर रहे हैं, ध्यान कर रहे हैं, दैवीय परिवर्तनों कोअपने जीवन में आत्मसात कर रहे हैं।

कार्यक्रम में आए अनेकों अतिथियों, भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने दिव्यता के दर्शन किये और अपने जीवन में आध्यात्मिकता के महत्व को महसूसभी किया। उन्होंने इस आयोजन की सराहना की और आयोजकों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। भक्ति गीतों की श्रृंखला, प्रेरकघटनाएं, जीवन बदलने वाले पाठ और सभी समस्याओं का अंतिम समाधान- 'दिव्य-ज्ञान' (ब्रह्मज्ञान) प्राप्त करने की जिज्ञासा रखी गई।डी.जे.जे.एस टीम की निस्वार्थ सेवायों एवं प्रयासों से यह कार्यक्रम उल्लेखनीय रूप से सफल रहा और अनेकों ही श्रद्धालुओं ने आत्मिक तौर से इसका भरपूर लाभ प्राप्त किया।

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