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ईश्वर असीम शक्ति के स्वामी है, लेकिन एक ऐसा बल है जिससे ईश्वर को अपने अधीन किया जा सकता है। यह बल है- ईश्वर के वास्तविक नाम की प्रबल शक्ति। ईश्वर के वास्तविक नाम के प्रति समाज को जागरूक करने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में इटावा, उत्तरप्रदेश में 10 जून, 2019 से 16 जून, 2019 तक विशाल व भव्य श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया। कथाव्यास साध्वी सुश्री पद्महस्ता भारती जी ने अप्रतिम रूप से भगवान कृष्ण की सरस कथाओं का वर्णन करते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दिव्य भजनों के दिव्य स्पंदन से सम्पूर्ण कार्यक्रम में आनंद का वातावरण बन गया।

Shrimad Bhagwat Katha Revealed Treasures of Eternal Divine Name in Etawah, U.P.

भक्तों ने भगवान की लीलाओं और गुणों के आधार पर उन्हें कई नाम दिए जैसे- बंसी बजैया, गोवर्धनधारी, गोपाल, माखन चोर, आदि। ईश्वर ने पृथ्वी पर धर्म की संस्थापना करने हेतु अनेकों बार अवतार स्वीकार किया है और हर बार उनके भक्तों ने उन्हें नए नाम से पुकारा है। परन्तु विचार करने योग्य तथ्य है कि यदि ईश्वर का यह नाम पावन करने वाला है तो जब कोई व्यक्ति प्रभु का नाम लेकर कोई गलत कार्य करने लगता है तब यह नाम उसकी दुर्भावनाओं को समाप्त क्यों नहीं करता। 

Shrimad Bhagwat Katha Revealed Treasures of Eternal Divine Name in Etawah, U.P.

यदि ईश्वर के नाम का स्मरण करने से भक्तों के समक्ष प्रभु प्रगट होते थे तो आज जब हम ईश्वर का नाम पुकारते है तो वह क्यों नहीं हमारे सामने प्रगट हुए। हस्तिनापुर में कौरवों द्वारा अपमानित किए जाने पर द्रौपदी ने श्री कृष्ण को पुकारा और प्रभु उसकी रक्षा हेतु वहां प्रगट भी हो गए। क्योंकि उसने प्रभु को वास्तविक नाम के माध्यम से बुलाया था। इसी वास्तविक नाम के द्वारा एक जीव अपने घट में प्रभु से जुड़ सकता है। यह नाम कालातीत व अक्षरों से परे है। कुरुक्षेत्र की भूमि पर श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को प्रदत गीता ज्ञान में प्रभु में स्पष्ट रूप से उच्चारित किया है कि ईश्वर का नाम अव्यक्त है उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। साथ ही यह नाम कभी समाप्त नहीं हो सकता।

पूर्ण सतगुरु ही ब्रह्मज्ञान की सनातन विद्धि द्वारा इस नाम को हमारी श्वासों में प्रगट करने में सक्षम होते है। सतगुरु ब्रह्मज्ञान के माध्यम से दिव्य नेत्र को उजागर कर शिष्य को आध्यात्मिक यात्रा की ओर अग्रसर करते है। कथा प्रसंग द्वारा साध्वी जी ने श्रद्धालुओं को सच्चे गुरु द्वारा आध्यात्मिक यात्रा पर अग्रसर होने का आग्रह किया।

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