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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा बिहार के मधेपुरा क्षेत्र में भक्तों को उनके अंतिम लक्ष्य की ओर ले जाने व भक्ति मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने हेतु विशाल व भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगल कलश यात्रा द्वारा हुई  जिसमे हजारों सौभाग्यवती महिलाओं ने भाग लिया और लोगों को विलक्षण कार्यक्रम में आमंत्रित किया। 15 दिसंबर 2018 से 23 दिसंबर 2018 तक आयोजित इस कथा ने लोगों के हृदयों को प्रभु के प्रति समर्पण से भर दिया।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी कालिंदी भारती जी ने भगवान विष्णु की दिव्य लीलाओं के गहन अर्थ को रखा। निःस्वार्थ स्वयंसेवकों द्वारा ईश्वर महिमा से ओतप्रोत भजनों ने लोगों को झुमने के लिए विवश कर दिया। साध्वी जी ने भगवान बुद्ध के जीवन से उदाहरण लेते हुए स्पष्ट किया कि मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना और इस माया से मुक्त होना है। उन्होंने उन घटनाओं को विस्तार से रखा जब सिद्धार्थ को जीवन की वास्तविकता के बारे में पता चला और उन्होंने इससे मुक्ति का मार्ग खोज लिया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ भगवान बुद्ध बने जब उन्होंने अपने गुरु ‘संत सुजाता’ द्वारा दिए गए भगवान के सच्चे नाम का ध्यान किया। उन्होंने इस अवधारणा को स्पष्ट किया कि प्रभु का असली नाम भाषा से परे है जिसे बोला नहीं जा सकता। ईश्वर का  वास्तविक नाम एक ब्रह्मांडीय ऊर्जा है जो दीक्षा के दौरान पूर्ण सतगुरु प्रदान करते हैं। ध्यान के दौरान, व्यक्ति अपने सभी अच्छे और बुरे कर्मों को जलता है और सर्वशक्तिमान से योग कर मुक्त हो जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि व्यक्ति को पूर्ण गुरु की खोज करनी चाहिए और उनसे दिव्य ज्ञान “ब्रह्मज्ञान” प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से ध्यान के बहुआयामी लाभों को भी भक्तों के समक्ष रखा। साध्वी जी ने बताया कि वर्तमान समय में, सर्व श्री आशुतोष महाराज जी पूर्ण सतगुरु हैं, जो लोगों को ब्रह्मज्ञान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों को संस्थान की सामाजिक गतिविधियों के बारे में बताया और उन्हें समाज की भलाई के लिए अपनी सेवाएं प्रदान करने के लिए भी प्रेरित किया। कथा में उपस्थित हज़ारों लोगों ने कथा की सफलता को स्पष्ट किया।
इस आयोजन ने सभी को मंत्रमुग्ध करते हुए व ईश्वर के प्रति जागरूक करते हुए जीवन में शांति और समृद्धि पाने हेतु प्रेरित किया गया।
 

Shrimad Bhagwat Katha Stressed upon Loving the God as the Path to Salvation in Madhepura, Bihar

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