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देवी भगवती अपार प्रेम और दया की प्रतीक हैं। वह हमेशा अपने सभी भक्तों पर दिव्य स्नेह प्रकट करती हैं। जिस तरह माँ अपने बेटे से प्रेम करती है, उसी तरह देवी भगवती अपनी संतान से प्रेम करती है और सभी को आशीर्वाद देती है। शास्त्रों में उल्लेख है कि देवी भगवती विभिन्न अवतारों को धारण करने वाली देवी हैं, जो अपने भक्तों के सभी कष्टों और दुखों को समाप्त कर, उन्हें कल्याण का आशीष देती हैं।

देवी के दिव्य संदेशों से श्रद्धालुओं को जागरूक करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने सीबीडी ग्राउंड, लीला होटल के सामने, शाहदरा, दिल्ली में श्रीमद्देवी भागवत कथा का सात दिवसीय आयोजन किया। दिव्य पंडाल में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने माँ की दिव्य कृपा का अनुभव किया। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी अदिति भारती जी ने कथा का वाचन करते हुए दर्शकों के सामने दिव्य युग की परिकल्पना को रखने का प्रयास किया।

कार्यक्रम की शुरुआत देवी के चरण कमलों में पवित्र प्रार्थना के साथ हुई। भक्ति भजन और प्रेरणादायक गीतों की श्रृंखला ने लोगों को इस मानव जीवन के मूल्य को समझने और ब्रह्मज्ञान द्वारा जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य की ओर बढ़ने हेतु प्रेरित किया। संगीत और विचारों ने श्रद्धालुओं के विचारों को ऊपर की ओर उठाते हुए, उन्हें सकारात्मक बदलाव की ओर निर्देशित किया।

साध्वी जी ने श्रोताओं को दुर्गा पूजा और विजयादशमी के वास्तविक अर्थ से परिचित करवाया। उन्होंने समझाया कि सभी पूजा पद्धतियों और मंदिरों की बढ़ती संख्या के बावजूद भी हमारे समाज में बहुत से भयानक कार्य और घटनाएँ देखने को मिल रही हैं। देवी मां ने राक्षस महिषासुर का वध किया और सच्चे धर्म की स्थापना की लेकिन आज धर्म के नाम पर युद्ध हो  रहे हैं। साध्वी जी ने धर्म की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म कोई बाहरिय मार्ग नहीं है बल्कि धर्म तो माँ शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव है।

आज हम सभी जानते हैं कि महिषासुर रूपी असुर हिंसा, दुर्घटनाओं, बलात्कार, मानव तस्करी, यौनकर्मियों और समाज में प्रच्छन्न युवाओं की बढ़ती संख्या के रूप में अपना साम्राज्य बढ़ाता जा रहा है। जब भी पुरुष, महिलाओं का अपमान करता है, तो समाज में संघर्ष उत्पन्न होता है। साध्वी जी ने कहा कि जब तक महिलाएं आज अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव नहीं करेंगी तब तक समाज में परिवर्तन असंभव है। साध्वी जी ने एक नए युग की सकारात्मकता, दिव्यता और आनंदमय वातावरण को स्पष्ट रूप से रखा जो आने वाले समय में पृथ्वी पर दिव्य प्राणियों द्वारा स्थापित किया जाएगा।

दर्शक, कथा वाचक के शब्दों और प्रेरणाओं के साथ नए दिव्य युग की मानसिक छवि का अनुभव करते हुए अभिभूत हुए, साथ ही श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम के लिए आयोजकों के प्रति हार्दिक आभार प्रस्तुत किया।

Shrimad Devi Bhagwat Katha Envisaged a New Divine Age in Shahdara, Delhi

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