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आजकल जब हर कोई नश्वर सुख की तलाश में है, और अधिक आत्म-केन्द्रित होता जा रहा है, जबकि समय का आह्वान मनुष्य को अपने साथियों की  निस्वार्थ सेवा करना है  ताकि दुनिया को जीने  के लिए एक बेहतर स्थान बनाया जा सके। निस्वार्थ सेवा तभी की जा सकती है, जब मन परमात्मा पर केंद्रित होता है। हमारे सभी शास्त्र ग्रन्थ दिव्य शिक्षाओं और महान विचारों से भरे हुए हैं; वे आत्म उन्नति  हेतु  मानव मन को बदल सकते हैं लेकिन हम उनमें छिपे वास्तविक संदेश को अपनी तार्किक बुद्धि से समझ नहीं सकते । ये स्व-जागृत और आत्म-अनुभवी संतों द्वारा लिखे गए थे जो मानवता को अपने आध्यात्मिक अनुभवों से लाभान्वित करना चाहते थे। सभी धर्मग्रंथ ईश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति (ब्रह्म ज्ञान) की  बात करते हैं जो केवल एक ब्रह्मनिष्ठ एवं  पूर्ण गुरु  ही हमें प्रदान कर सकते हैं। आध्यात्म द्वारा व्यक्ति अपने अंतर्घट में ईश्वर साक्षात्कार कर परमानन्द को प्राप्त कर सकता है ।

Sunderkand Path Enlightened Masses with the Wisdom of Brahm Gyan at Gold Coast, Queensland, Australia

मानव के भीतर ईश्वर दर्शन के दिव्य कोष को प्रकट करने के उद्देश्य से गोल्ड कोस्ट हिंदू कल्चरल एसोसिएशन (GCHCA) ने 19, अप्रैल, 2019 को गोल्ड कोस्ट, क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया में सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन किया गया l जिसमें अपने विचारों को प्रस्तुत करने के लिए डीजेजेएस को आमंत्रित किया गया। सुंदरकांड का पूरा विवरण अंग्रेजी भाषा में किया गया।

Sunderkand Path Enlightened Masses with the Wisdom of Brahm Gyan at Gold Coast, Queensland, Australia

सुंदरकांड में  प्रमुख पात्र भगवान श्री हनुमान जी के अद्भुत एवं साहसिक लीलाओ  का वर्णन किया गया है। श्री हनुमान जी को उनकी माता अंजनी द्वारा सुंदर कहा गया । श्री हनुमान जी  की लीलाओ  का वर्णन करते हुए, ऋषि वाल्मीकि श्रोताओ को गुरु के प्रति विश्वास रखने पर महत्व देते है (जैसे श्री हनुमान जी का भगवान श्री राम के प्रति), एक अच्छे इंसान होने की आवश्यकता एवं किसी भी कार्य क प्रति पूर्ण समर्पण (जैसे श्री हनुमान जी की माता सीता को खोजने में एकनिष्ठा) l कार्यक्रम में ' चलो मनुष्य बने '  पर प्रकाश डाला गया l   मनुष्य का अर्थ होता है मननशील होना अर्थात सत्य को ग्रहण कर उसका आचरण करना l  धर्मनिष्ठ भक्त श्री हनुमान के विषय के माध्यम से भक्तों को वैदिक काल की तरह खोए हुए मानवीय संतुलन को नियंत्रित करने के लिए प्रेरित किया गया l

कथा वाचक साध्वी दीपिका भारती जी ने सुंदरकांड के माध्यम से जीवन निर्देशन के उपदेशों की व्याख्या की और  जीवन के साथ अध्यात्मवाद के महत्व तथा उसके सम्बन्धो की अभिव्यक्ति के व्यावहारिक उदाहरण दिये l

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