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1 मार्च 2026 को, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिल्ली के दिव्य धाम आश्रम में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें होली के पावन पर्व के गहन आध्यात्मिक स्वरूप को दर्शाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भक्ति और सत्य के रंगों से परिपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।

A Grand Monthly Spiritual Congregation held at Divya Dham Ashram, Delhi: A Flow of Spiritual Inspiration from the Festival of Holi

आध्यात्मिक आरंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ वेदमंत्रों तथा भक्तिपूर्ण भजनों के साथ हुआ, जिसने एक शांत वातावरण निर्मित किया। इसके पश्चात एक आध्यात्मिक नाटक तथा चिंतन-प्रेरक व्याख्याएँ प्रस्तुत की गईं। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) के शिष्यों ने बताया कि होली के रंग दिव्य प्रेम, एकता और आत्मिक जागृति का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा उत्सव केवल बाह्य उल्लास में नहीं, बल्कि मुख्यतः आंतरिक जागृति में निहित है। भक्तों को प्रोत्साहित किया गया कि वे अपने भीतर निरंतर दिव्य सत्ता का चिंतन व स्मरण बनाए रखें।

A Grand Monthly Spiritual Congregation held at Divya Dham Ashram, Delhi: A Flow of Spiritual Inspiration from the Festival of Holi

होलिका दहन: आंतरिक विकारों का अंत

प्रवचन में होलिका दहन के गहरे अर्थ पर प्रकाश डाला गया, जिसमें क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या और अज्ञान जैसे आंतरिक दोषों को स्वाहा करने का संदेश दिया गया। सत्संग में बताया गया कि वास्तविक होली तब मनाई जाती है जब हृदय भक्ति, विनम्रता और समर्पण के रंगों से रंग जाता है।

प्रह्लाद चरितम्: भक्त की विजय

प्रह्लाद चरितम् की प्रेरणादायक प्रस्तुति में प्रह्लाद की अडिग श्रद्धा और विश्वास को दर्शाया गया, जिसे गुरु नारद के मार्गदर्शन ने पोषित किया। नाटक में दिखाया गया कि अहंकार विनाश का कारण बनता है, जबकि विनम्रता से दिव्य संरक्षण मिलता है। इसने भक्तों को यह स्मरण दिलाया कि भगवान सर्वत्र हैं और शुद्ध हृदय वालों की रक्षा करते हैं। संदेश स्पष्ट था: गुरु-प्रेरित भक्ति, विश्वास और सद्भावना से धर्म की अधर्म पर विजय होती है।

समापन

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्यों ने निष्कर्ष रूप में कहा कि दिव्य गुरु के आशीर्वाद से दृढ़ हुई भक्ति अजेय होती है। यद्यपि सांसारिक विपदाएं कुछ समय के लिए प्रभावी हो सकती है, परंतु गुरु के ज्ञान से उत्पन्न आध्यात्मिक शक्ति अंततः विजयश्री को प्राप्त करती है। सत्संग का समापन सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। संपूर्ण कार्यक्रम ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेम, विश्वास और आध्यात्मिक जागृति के वास्तविक रंगों में रंगने के लिए प्रेरित किया। तत्पश्चात सामूहिक भंडारे के आयोजन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस प्रकार होली केवल बाह्य रंगों का उत्सव बनकर नहीं, बल्कि भक्ति और विश्वास के रंग लिए, आत्मा और परमात्मा के मिलन के उत्सव के रूप में मनाई गई।

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