दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा नूरमहल आश्रम, पंजाब में 20 अक्टूबर 2025 को दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की दिव्य प्रेरणा से एक विलक्षण “ग्रीन दिवाली” उत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आध्यात्मिकता और पर्यावरण-जागरूकता के अनोखे संगम को लिए हुए था। डीजेजेएस के प्रकृति संरक्षण कार्यक्रम “संरक्षण” के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था “दिव्य दिवाली- तमसो मा ज्योतिर्गमय”- अंधकार से दिव्य प्रकाश की ओर; जिसने सभी उपस्थित लोगों को दीपों के इस पर्व के पीछे छिपे गहरे संदेश - जागरुकता, करुणा और पर्यावरणीय संतुलन की याद दिलाई। शोरगुल और प्रदूषण से परे, डीजेजेएस की यह ग्रीन दिवाली एक आत्ममंथन का आह्वान बनकर उभरी, जहाँ दीपों का प्रकाश केवल घरों को ही नहीं, बल्कि हृदय और मन की आभा को भी प्रकाशित करता चला गया।

उत्सव का शुभारंभ पवित्र हवन यज्ञ और वैदिक मंत्रोच्चारण से हुआ, जिसने एक शांत, पवित्र और आध्यात्मिक रूप से उन्नत वातावरण का सृजन किया। एक अत्यंत प्रेरणादायक क्षण को चिह्नित करते हुए आश्रम परिसर में 1.25 लाख मिट्टी के दीपक प्रज्वलित किए गए, जिन्हें मनोहरी आकृतियों में कलात्मक रूप से सजाया गया था और जो आत्मा की उस शक्ति का प्रतीक थे, जो अज्ञानता के अंधकार को ब्रह्मज्ञान के प्रकाश से मिटाती है। कार्यक्रम में भक्तिमय संगीत और पर्यावरण-संबंधित प्रस्तुतियों का सुंदर संगम देखने को मिला, जो इस बात का संदेश दे रहा था कि सच्चा उत्सव सादगी और आध्यात्मिक गहराई में निहित हुआ करता है। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षक एक मनमोहक विषय आधारित नृत्य-नाटिका थी, जिसमें पवित्र आदर्शों को जीवंत किया गया। इस हृदयस्पर्शी प्रस्तुति ने प्रत्येक दर्शक को गहराई से प्रभावित किया और सबको स्मरण कराया कि दिवाली केवल उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आंतरिक रूपांतरण और उच्चतर मूल्यों से पुन: जुड़ने का अवसर भी है।
डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने अपने विचारों में कहा कि दिवाली केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक ज्योति प्रज्वलन की गहन आतंरिक यात्रा है। साज-सज्जा और उत्सवी परंपराओं के साथ, दीवाली का एक गूढ़ आध्यात्मिक महत्व भी है—यह मानवता को जागृति और पर्यावरणीय संतुलन की आवश्यकता का संदेश देती है। डीजेजेएस प्रवक्ताओं ने कहा कि सच्चा प्रकाश आत्मा के जागरण में है, जो केवल समय के पूर्ण आध्यात्मिक गुरु द्वारा प्रदत्त ब्रह्मज्ञान से संभव है। जब यह आंतरिक प्रकाश प्रज्वलित हो जाता है, तो जीवन का प्रत्येक क्षण दिवाली बन जाता है, जहाँ हर कर्म प्रकृति और सभी प्राणियों के प्रति करुणा व संतुलन से प्रेरित होता है।

कार्यक्रम का समापन मंगल आरती और सामूहिक ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसने सभी को भीतर झाँकने और इंद्रियों से परे शांति का अनुभव करने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम को प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यमों पर व्यापक कवरेज मिली। उपस्थितजन केवल उत्सव की प्रसन्नता ही नहीं, बल्कि यह गूढ़ बोध लेकर लौटे कि ग्रीन दिवाली केवल पर्यावरण रक्षा का भाव नहीं, अपितु ज़िम्मेदारी से, आध्यात्मिकता में और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का आह्वान है।