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दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक और संचालक, डीजेजेएस) के ब्रह्मज्ञानी शिष्य व निःस्वार्थ कार्यकर्ता, जो संस्थान के अनेक सामाजिक-अध्यात्मिक कार्यक्रमों में अपना बहुमूल्य समय और ऊर्जा निष्काम रूप से अर्पित करते रहते हैं, उनमें नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करने हेतु डीजेजेएस द्वारा 2 अक्टूबर, 2024 को दिल्ली के दिव्य धाम आश्रम में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

DJJS Organised a Motivational Event to inspire the Volunteers on the path of Sewa (Selfless-Service) at Divya Dham Ashram, Delhi

इस कार्यक्रम में डीजेजेएस के प्रचारकों ने हनुमान जी और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों और परम सेवकों के जीवन से प्रेरणा लेते हुए गुरु के महान मिशन में निस्वार्थ सेवा के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि इन महापुरुषों ने लोक-कल्याण और समाज उत्थान के लिए जिस प्रकार प्राणपन से अपनी निस्वार्थ सेवाएं अर्पित की थीं, आज उसी प्रकार हम सबको भी उनसे सीखकर अपने कार्यों में वैसी ही निष्कामता को अपनाने की आवश्यकता है।

डीजेजेएस के प्रचारकों ने समझाया कि निस्वार्थ सेवा भक्ति पथ का अभिन्न अंग है, जो व्यक्ति और समाज दोनों को समृद्ध बनाती है। सेवा हमारे और ईश्वर के बीच के संबंध को गहरा बनाने के साथ-साथ सबके आपसी संबंध को भी मज़बूत बनाती है। अतः यह आध्यात्मिक पथ का एक महत्वपूर्ण पहलू है। सेवा द्वारा सहानुभूति, दया व करुणा जैसे गुणों का विकास होता है जो आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

DJJS Organised a Motivational Event to inspire the Volunteers on the path of Sewa (Selfless-Service) at Divya Dham Ashram, Delhi

डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने निष्काम सेवा के पथ पर ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हुए समझाया कि ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान आंतरिक शांति व स्पष्टता का एक महत्वपूर्ण आधार है जो सेवकों को उनके लक्ष्य से गहराई से जोड़ देता है। नियमित ध्यान के अभ्यास द्वारा सेवक अपने संकल्पों को दृढ़ता व भावनात्मक संतुलन प्रदान करते हैं और सेवाकार्य को अधिक प्रतिबद्धता और सतर्कता से पूर्ण कर पाते हैं। प्रचारकों ने उपस्थित सेवादारों को ध्यान को अपनी जीवनचर्या का एक अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित करते हुए समझाया कि ध्यान से न केवल व्यक्तिगत कल्याण होता है बल्कि समाज में उनके निःस्वार्थ योगदान का प्रभाव भी बढ़ता है।

अंत में प्रचारकों ने कहा कि दिव्य गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी, जो डीजेजेएस के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत हैं, वे स्वयं ही निस्वार्थता और समर्पण की अनूठी मिसाल हैं, इसलिए उनका व्यक्तित्व सभी सेवादारों के लिए एक उच्चतम उदाहरण स्थापित करता है। सतगुरु ही अपने शिष्यों को निष्काम सेवा का पाठ पढ़ाने वाले आध्यात्मिक ज्ञान के प्रकाश स्तम्भ हुआ करते हैं। 

सामूहिक ध्यान सत्र के बाद सामुदायिक भोज के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया जिसमें सभी कार्यकर्ताओं ने संगठन की शक्ति का अनुभव किया। इस अलौकिक वे प्रेरणादायी कार्यक्रम ने उपस्थित सभी सेवादारों में नवीन उत्साह का संचार करते हुए उन्हें निःस्वार्थ सेवा के पथ पर अग्रसर होने की भावना से परिपूर्ण कर दिया।

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