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संस्कारशाला, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (DJJS) के समग्र शिक्षा प्रयास मंथन-सम्पूर्ण विकास केन्द्र (SVK) द्वारा एक विशेष मासिक पहल है, जो 4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समृद्धि प्रदान करने वाला मंच है। यह पहल युवा मस्तिष्कों को शाश्वत गुणों और भावनात्मक दृढ़ता से आकार देने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है। इन सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा का समावेश किया जाता है।

Dress-Up Hygiene: The Values of Cleanliness, Dignity and Character | DJJS Manthan SVK | July 2026

जुलाई 2026 में, मंथन SVK ने अपनी श्रृंखला “स्वच्छ आदतें, श्रेष्ठ संस्कार” के अंतर्गत “ड्रेस-अप हाइजीन” (वस्त्र स्वच्छता) विषय पर एक प्रेरणादायी संस्कारशाला सत्र का आयोजन किया। इसमें स्वच्छ और गरिमापूर्ण वेशभूषा के महत्व को अनुशासन, आत्म-सम्मान और उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन-शैली की अभिव्यक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

इस माह के दौरान संस्थान की विभिन्न शाखाओं में 35 संस्कारशाला कार्यशालाओं का सफल आयोजन किया गया, जिनसे लगभग 1,693 बच्चे लाभान्वित हुए। इनमें भारतभर के DJJS मंथन केंद्रों के विद्यार्थियों के साथ-साथ प्रवासी भारतीय (NRI) प्रतिभागी भी सम्मिलित रहे:

Dress-Up Hygiene: The Values of Cleanliness, Dignity and Character | DJJS Manthan SVK | July 2026
  1. मध्य प्रदेश
  • मानकुंवर मैरिज गार्डन, जबलपुर
  1. नई दिल्ली
  • एम.सी.डी. प्राइमरी मॉडल स्कूल, कैलाश कॉलोनी
  1. राजस्थान
  • लीलावती इंटरनेशनल स्कूल, भीलवाड़ा

इन सत्रों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छ, स्वास्थ्यकर एवं मौसम के अनुरूप वेशभूषा के महत्त्व तथा उसके स्वास्थ्य एवं समग्र कल्याण में योगदान के प्रति जागरूक किया गया। संवादात्मक गतिविधियों, सामूहिक परिचर्चाओं और व्यावहारिक सुझावों के द्वारा विद्यार्थियों ने यह समझा कि उचित वेशभूषा किस प्रकार आत्मविश्वास, गरिमा, अनुशासन और उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन को सुदृढ़ करती है, साथ ही व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र को भी प्रतिबिंबित करती है।

इसके अतिरिक्त, इन सत्रों में भारतीय परिधानों और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत पर भी प्रकाश डाला गया। बच्चों को पारंपरिक वस्त्रों के महत्व, क्षेत्रीय विविधता और सादगी एवं गरिमापूर्ण परिधान से जुड़े मूल्यों से परिचित कराया गया । इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी दैनिक जीवनशैली को भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गर्व एवं सम्मान की भावना विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

अंत में समस्त प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शांति मंत्र का उच्चारण किया, जिससे वातावरण शांति, सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक आनंद से ओतप्रोत हो उठा। तत्पश्चात सभी बच्चों ने श्रद्धापूर्वक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पावन चरणों में नमन अर्पित कर उनकी दिव्य कृपा एवं आशीर्वाद की प्रार्थना की।

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