8 मई 2025 को, मूल्य-आधारित समग्र शिक्षा के पोषण हेतु अथक प्रयास में, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सामाजिक प्रकल्प, मंथन- सम्पूर्ण विकास केंद्र द्वारा दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रम में वार्षिक उत्सव के रूप में ‘संस्कारnival – बचपन का पर्व, भारत का गर्व’ आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 2024-25 में देश भर में आयोजित संस्कारशाला कार्यशालाओं में सीखे गये मूल्यों को स्मरण किया गया एवं उन बच्चों को सर्टिफ़िकेट्स देकर प्रोत्साहित किया गया जिन्होंने पूरे वर्ष इस परिवर्तनकारी यात्रा का अभिन्न अंग बन अपने व्यक्तित्व को सकारात्मक परिवर्तन के साँचे में ढालने का प्रयास किया।

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में मंथन प्रकल्पों ग्रामीण और झुग्गी-झोपड़ियों के वंचित बच्चों को शैक्षणिक दक्षता के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्य प्रदान कर उनके निर्माण व उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। संरचित संस्कारशाला सत्रों के माध्यम से, बच्चों के जीवन को समृद्ध करने वाले मूल्य, आध्यात्मिक ज्ञान, अनुशासन और गौरव प्रदान किया जाता है, जिससे बच्चों के मन और चरित्र का समवेत रूप से विकास होता है।
इस समारोह में दिव्य धाम, विकासपुरी और रोहिणी सेक्टर-15 स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की शाखाओं के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस कार्यक्रम को पूरे वर्ष में सिखाए गए मूल्यों को प्रतिबिंबित करने के लिए सोच-समझकर तैयार किया गया था, जिसमें परस्पर संवादात्मक सत्र, मूल्य-केंद्रित गतिविधियाँ, विचारोत्तेजक प्रश्नोत्तरी खंड और भावपूर्ण सांस्कृतिक और भक्ति नृत्य प्रदर्शन का जीवंत मिश्रण सम्मिलित था। प्रत्येक तत्व ने संस्कारशाला के माध्यम से बच्चों की गहरी समझ, रचनात्मकता और व्यक्तिगत विकास को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ भूल-भुलयिया गतिविधि से हुआ जिससे बच्चों ने विकट दिख रही परिस्थिति का समाधान खोज निकालने की अनूठी शिक्षा को प्राप्त किया।

सबसे प्रतीक्षित खंडों में से एक प्रमाण पत्र वितरण समारोह था, जहाँ छात्रों को उनके निरंतर भागीदारी के लिए सम्मानित किया गया। प्रमाण पत्र संस्थान के प्रचारिका - साध्वी रचिता भारती जी, साध्वी योगदिव्या भारती जी, साध्वी अनामिृता भारती जी, साध्वी सुमन भारती जी, साध्वी रिपुहाना भारती जी और साध्वी पूजा भारती जी द्वारा प्रदान किए गए। प्रत्येक प्रचारिका ने शिक्षा में मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए अपने भावपूर्ण विचार साझा किए और बच्चों से संस्कारशाला की शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, छात्रों ने ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ गतिविधि में भाग लिया, जो रचनात्मकता और पर्यावरण जागरूकता का मिश्रण था। बच्चों ने बेकार पड़ी वस्तुओं का उपयोग करके व्यावहारिक और कल्पनाशील रचनाएँ तैयार कीं, जो स्थिरता और सचेत जीवन के सिद्धांतों को पुष्ट करती हैं। साध्वी दीपा भारती जी ने उनके प्रयासों की सराहना की और उन्हें सचेत नवाचार को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत में निहित रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
माता-पिता और अभिभावकों की मौजूदगी ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। कई लोगों ने अपने बच्चों के व्यवहार, मानसिकता और भावनात्मक परिपक्वता में आए सकारात्मक बदलावों के लिए आभार व्यक्त किया और मंथन के संरचित, मूल्य-संचालित दृष्टिकोण को इसका श्रेय दिया।
कार्यक्रम का समापन एक समूह फोटोग्राफ और सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ, जिससे वातावरण आनंद, गर्व और आध्यात्मिक उत्थान से भर गया। संस्कारनिवल 2025 न केवल उपलब्धि के उत्सव के रूप में खड़ा था, बल्कि नैतिक रूप से जागृत और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली पीढ़ी को आकार देने के लिए संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि के रूप में भी विशेष था।
जैसे ही समारोह का समापन हुआ, परम पूज्य श्री आशुतोष महाराज जी का दृष्टिकोण एक बार फिर गूंज उठा - कि सच्चा राष्ट्र निर्माण मूल्यों, अनुशासन और भक्ति में निहित शिक्षा के माध्यम से युवा दिलों के पोषण से ही प्रारंभ होता है।
