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मानव को सांसारिक विक्षिप्तताओं एवं अशांति से मोड़कर जागृत एवं शांत अंतःकरण की ओर मार्गदर्शित करने के महान उद्देश्य के साथ दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा नूरमहल आश्रम, पंजाब में 28 एवं 29 मार्च 2026 को एक परिवर्तनकारी दो-दिवसीय साधना शिविर का आयोजन किया गया। यह आध्यात्मिक पहल साधकों को ब्रह्मज्ञान के शाश्वत विज्ञान एवं उसके अनगिनत श्रेष्ठ लाभों से परिचित कराने के लिए समर्पित थी, जिससे वे अपने वास्तविक स्वरूप का बोध कर पाएं और भौतिक संसार की सीमाओं से परे स्थायी शांति पा सकें।

Meditation Camp at Nurmahal, Punjab encouraged participants to follow the path of harmony, devotion & enlightenment

शिविर में इस बात पर बल दिया गया कि वास्तविक ध्यान केवल एकाग्रता का अभ्यास मात्र नहीं है, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक जागृति है, जो पूर्ण गुरु की कृपा से प्राप्त होती है। ज्ञानवर्धक प्रवचनों और ध्यान सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी बाह्य जिम्मेदारियों को आंतरिक स्थिरता से संतुलित करने में समर्थ किया गया, जिससे वे आत्मज्ञान, विश्व बंधुत्व और शाश्वत आनंद की राह पर चल सके।

साधना शिविर को डीजेजेएस प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत आत्मोन्नत करने वाले प्रवचनों ने और भी प्रभावशाली बना दिया। उन्होंने आध्यात्मिक गहराई के साथ-साथ अत्यंत स्पष्ट शैली में मानव अस्तित्व के दिव्य आयामों को उजागर किया। आर्ष ग्रंथों व शास्त्रों के शाश्वत ज्ञान को व्यावहारिक जीवन के उदाहरणों के साथ जोड़ते हुए वक्ताओं ने यह समझाया कि मानव के दुःख का मूल कारण उसके अपने वास्तविक दिव्य स्वरूप का विस्मरण है।

Meditation Camp at Nurmahal, Punjab encouraged participants to follow the path of harmony, devotion & enlightenment

उन्होंने समझाया कि मनुष्य का मन स्वभावतः अशांत है, हमेशा इच्छाओं, संबंधों और विकर्षणों द्वारा बाहर की ओर प्रवृत्त होता है। ऐसी स्थिति में, सुख के क्षण भी क्षणिक होते हैं, अतः असंतोष की स्थिति बनी रहती है। प्रवचन में यह रेखांकित किया गया कि सच्चा और शाश्वत आनंद बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह तो आत्मा का स्वाभाविक गुण है, जो सच्चे ध्यान के अभ्यास द्वारा भीतर मुड़ने पर ही उपलब्ध होता है।

प्रतिनिधियों ने आगे बताया कि अध्यात्म सांसारिक कर्तव्यों का परित्याग नहीं कराता, बल्कि उन्हें संतुलन, सतर्कता और उज्ज्वल दृष्टिकोण के साथ निभाने के लिए प्रेरित करता है। जब व्यक्ति आंतरिक रूप से जुड़ा हुआ और आध्यात्मिक रूप से जागरूक होता है, तो उसके कर्म स्वाभाविक रूप से अधिक निस्वार्थ, सामंजस्यपूर्ण और प्रभावशाली हो जाते हैं, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में लाभ होता है।

डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने बहुत सुंदर ढंग से बताया कि सतगुरु केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने आचरण से नेतृत्व करते हैं। उनका जीवन स्वयं एक जीता-जागता शास्त्र होता है, जिसमें पवित्रता, करुणा, विनम्रता और निश्चल सत्य का सहज दर्शन होता है। उनके मार्ग का अनुसरण करते हुए शिष्य धीरे-धीरे इन दिव्य गुणों को अपने भीतर धारण करता जाता है और आध्यात्मिक रूप से उन्नत होने के साथ-साथ एक श्रेष्ठ मानव भी बनता है।

प्रवचनों में यह भी उजागर किया गया कि गुरु और शिष्य के बीच का संबंध पवित्र और शाश्वत है। यह भौतिकता से अति परे, आध्यात्मिक संबंध में निहित होता है। जब साधक श्रद्धा और सत्यता के साथ गुरु चरणों में समर्पण करता है, तो गुरु की कृपा निर्बाध रूप से सहज ही शिष्य के जीवन में प्रवाहित होने लगती है, जिससे शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति तीव्र हो जाती है। अंततः पूर्ण गुरु सीमित और असीम के बीच, आत्मा और परम चेतना के बीच सेतु का कार्य करते हैं। उनके मार्गदर्शन के बिना, राह अनिश्चित रहती है; उनकी कृपा से, यात्रा प्रकाशपूर्ण, उद्देश्यपूर्ण और आनंददायक हो जाती है।

सार रूप में, यह साधना शिविर डीजेजेएस के विश्व शांति एवं जन कल्याण के उद्देश्य की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हुआ| मानव को उसके वास्तविक दिव्य स्वरूप को जागृत कर उससे साक्षात्कार कराने जैसे महान प्रयासों के माध्यम से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान सतत मानवता का मार्ग प्रशस्त कर रहा है| संस्थान ब्रहमज्ञान द्वारा मानव को उसके उच्चतम दिव्य सामर्थ्य का बोध करा आनंद, शांति व सत्य की शाश्वत अनुभूति प्रदान कराने में निरंतर प्रयासरत है।

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