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Monthly Spiritual Congregation at Divya Dham Ashram, Delhi: A day of steadfast resolve to tread the path of Spiritual Awakening as shown by Divya Gurudev

दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में गुरु प्रेम से ओतप्रोत मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम में ध्यानाभ्यास, निःस्वार्थ सेवा एवं दिव्य गुरु के उपदेशों पर चलने का संकल्प लिया

सच्चे गुरु की शाश्वत आध्यात्मिक उपस्थिति और उपदेशों का सम्मान करने तथा पूर्ण गुरु के प्रति निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 1 फरवरी 2026 को दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की समाधि के बारह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य इस शाश्वत संदेश को पुनः सुदृढ़ करना था कि गुरु केवल भौतिक शरीर तक सीमित नहीं होते, बल्कि सच्चे साधकों के लिए एक जीवंत एवं मार्गदर्शक चेतना के रूप में सदैव उपस्थित रहते हैं। इस अवसर पर दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु, शिष्य और साधक उपस्थित हुए। सत्संग का शुभारंभ सामूहिक प्रार्थना एवं भावपूर्ण भजनों से हुआ, जिन्होंने दिव्य कृपा का आह्वान किया और श्रद्धालुओं के हृदयों को गहन आध्यात्मिक अनुभूति हेतु तैयार किया।

Monthly Spiritual Congregation at Divya Dham Ashram, Delhi: A day of steadfast resolve to tread the path of Spiritual Awakening as shown by Divya Gurudev

डीजेजेएस के प्रवक्ताओं ने ‘गुरु प्रेम’ के गूढ़ विषय पर आध्यात्मिक प्रवचन प्रस्तुत किए। डीजेजेएस प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि ‘गुरु प्रेम’ केवल भावनात्मक आसक्ति नहीं है, बल्कि यह एक परिवर्तनकारी शक्ति है, जो अहंकार को विलीन करती है, चेतना को शुद्ध करती है और शिष्य की इच्छा को दिव्य उद्देश्य के साथ संरेखित करती है। शास्त्रों एवं प्रत्यक्ष आध्यात्मिक अनुभवों के आधार पर यह बताया गया कि गुरु के प्रति समर्पण आत्म-साक्षात्कार का द्वार खोल देता है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की बारह वर्षों की ‘समाधि’ का गंभीर स्मरण रहा। डीजेजेएस के प्रतिनिधि ने इस बात पर बल दिया कि ‘समाधि’ कोई अंत नहीं बल्कि सर्वोच्च आध्यात्मिक उत्कर्ष की अवस्था है, जो गुरु की शाश्वत उपस्थिति और अनवरत मार्गदर्शन का प्रतीक है। श्रद्धालुओं को याद दिलाया गया कि सच्चा गुरु समय और रूप से परे है, जो विश्वास, अनुशासन और प्रेम के साथ आने वाले साधकों की आंतरिक यात्रा को लगातार प्रकाशित करता है।

डीजेजेएस के निस्वार्थ स्वयंसेवकों द्वारा प्रसिद्ध सूफी संत बुल्ले शाह के जीवन और काव्य पर आधारित एक प्रभावशाली और भावपूर्ण नाट्य प्रस्तुति भी हुई। इस नाटक ने संत बुल्ले शाह की समर्पण यात्रा, दिखावटी धार्मिकता के विरुद्ध उनके विद्रोह एवं गुरु के प्रति उनकी निःशर्त प्रेम भावना को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया। भावपूर्ण अभिनय, संगीत और कविता के माध्यम से नाटक ने ‘गुरु प्रेम’ की सच्ची भावना को उद्घाटित किया, कि गुरु के प्रति सच्चा प्रेम सामाजिक नियमों, बौद्धिक अहंकार और बाह्य पहचान से कहीं ऊपर है।

डीजेजेएस प्रतिनिधि ने पुनः दोहराया कि दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी ने सदैव साधकों को अपने भीतर दिव्यता को खोजने, धर्ममय जीवन जीने और करुणा के साथ मानवता की सेवा करने का मार्गदर्शन दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान को दैनिक जीवन के आचरण के साथ जोड़कर अपने जीवन को रूपांतरित करने की प्रेरणा दे रही हैं। इस प्रकार, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की समाधि के बारह वर्ष पूर्ण होना केवल एक स्मृति-चिह्न नहीं, बल्कि गुरु के शाश्वत मार्गदर्शन की जीवंत अनुभूति रहा।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित निर्देशित ध्यान सत्र में श्रद्धालुओं को अंदर की ओर मुड़कर गुरु की कृपा से गहराई से जुड़ने का अवसर मिला, जिससे डीजेजेएस द्वारा प्रतिपादित अनुभवशील आध्यात्मिकता का सार पुष्ट हुआ। मासिक आध्यात्मिक कार्यक्रम का समापन गहन कृतज्ञता एवं नवसंकल्प के भाव के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे ध्यानाभ्यास, निःस्वार्थ सेवा और गुरु के उपदेशों का चिंतन और आचरण करके अपने ‘गुरु प्रेम’ को और अधिक गहरा करेंगे।

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