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श्री राम भक्त ‘भरत’ द्वारा अनुकरणीय, जीवन की चुनौतियों को पार करने हेतु समर्पण, विश्वास व सहनशीलता के शाश्वत मूल्यों को उजागर करने हेतु ‘दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान’ द्वारा महाकुंभ, प्रयागराज में 24 जनवरी 2025 को ‘नाट्योत्सव - थिएट्रिकल एक्सक्लूसिव’ के अंतर्गत ‘अंतिम परीक्षा’ नामक नाट्योत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह भव्य प्रस्तुति श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में आरम्भ हुई ‘दिव्य ज्योति चलचित्रम शृंखला 2’ का एक अभिन्नअंग है। इस नाटक में डीजेजेएस के निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं द्वारा प्रसंग की भावनात्मक व आध्यात्मिक गहराई को दर्शाते हुए एक अद्भुत प्रदर्शन किया गया। विश्व भर से एकत्रित हुए असंख्य भक्तों व जिज्ञासुओं को इस कार्यक्रम ने अलौकिक दिव्य प्रेरणाओं के साझे अनुभव प्रदान किए।

Natyotsava- Theatrical Exclusive - अंतिम परीक्षा: A Soulful Depiction of Divine Love, Absolute Surrender & Unwavering Devotion organized by DJJS at Mahakumbh, Prayagraj

डीजेजेएस की प्रचारक, साध्वी दीपा भारती जी ने नाटक पर संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि नाटक रामायण में चित्रित श्री राम के अनुज भरत की अद्वितीय भक्ति पर आधारित है। भगवान राम के प्रति भरत की भक्ति, उनके मूल्यों व उनकी यात्रा की आध्यात्मिक प्रासंगिकता जैसे प्रमुख जीवन प्रसंगों को नाटक में उजागर किया गया। नाटक ने भरत के चुनावों में निहित सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों- कर्तव्य, त्याग व दिव्य प्रेम पर प्रकाश डाला। 

डीजेजेएस की अन्य प्रचारक, साध्वी भक्ति प्रिया भारती जी ने नाटक के मुख्य विषय ‘राम प्रेमाभक्त भरत’ पर विवरण प्रस्तुत किया। साध्वी जी ने भरत के बलिदान, उनकी कर्तव्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता व उनकी निःस्वार्थ भावना को उजागर करते हुए उन्हें एक सच्चे भक्त के उदाहरण रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने समझाया कि जीवन की अंतिम परीक्षा सत्य, आंतरिक परिवर्तन व मुक्ति की खोज में आत्मा की यात्रा का प्रतीक है। साध्वी जी ने बताया कि यह नाटक विभिन्न पात्रों के सार्थक चित्रण के माध्यम से उन आंतरिक युद्धों का प्रतीक है जिनका सामना प्रत्येक आत्मा को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने हेतु करना पड़ता है। नाटक में जीवन की प्रतिकूल परिस्थितियों में विश्वास, धैर्य व ज्ञान को मार्गदर्शक शक्ति के रूप में उजागर किया गया। साध्वी जी ने ‘ब्रह्मज्ञान’ द्वारा ईश्वर साक्षात्कार से अपने कर्मों को धर्मानुकूल बनाने व अपने अंदर दिव्य सत्य की खोज करने के महत्व पर बल दिया। 

Natyotsava- Theatrical Exclusive - अंतिम परीक्षा: A Soulful Depiction of Divine Love, Absolute Surrender & Unwavering Devotion organized by DJJS at Mahakumbh, Prayagraj

साध्वी जी ने निष्कर्षित करते हुए समझाया कि ‘महाकुंभ’ मोक्ष की खोज का प्रतीक है और यह नाटक श्री भरत जी के त्याग व निष्ठा की आध्यात्मिक यात्रा के माध्यम से इस खोज को प्रतिबिंबित करता है। नाटक ने जीवन की अंतिम परीक्षाओं का चित्रण कर आत्म-साक्षात्कार के मार्ग को उजागर किया और उपस्थित श्रद्धालुओं को समय के पूर्ण सतगुरु से ‘ब्रह्मज्ञान’ प्राप्त करने व अपने आंतरिक संघर्षों को पार करने हेतु प्रेरित किया। नाटक ने सनातन धर्म की शिक्षाओं की कालातीत प्रासंगिकता की पुष्टि कर मीडिया का अत्यधिक ध्यान आकर्षित किया और साधकों को धर्म से जुड़ने व दिव्य ज्ञान को अपनाने का आग्रह किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आत्मिक-जाग्रति व आंतरिक परिवर्तन को बढ़ावा देने हेतु डीजेजेएस की प्रतिबद्धता को व्यापक रूप से सराहा।

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