संस्कारशाला एक मासिक कार्यशाला है जो दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के समग्र शिक्षा प्रकल्प मंथन संपूर्ण विकास केंद्र द्वारा 4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए आयोजित की जाती है। प्रत्येक माह की भाँति सितंबर माह की संस्कारशाला का विषय था ‘मंथन संस्कारशाला’। इस माह बच्चों ने संस्कारशाला में मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र व मंथन की विचारधारा के विषय में जाना। सितंबर 2024 माह में कुल 67 मंथन संस्कारशालाओं का आयोजन किया गया जिसके माध्यम से कुल 3459 बच्चे लाभान्वित हुए।

देश भर में निम्नलिखित विद्यालयों में भी मंथन संस्कारशाला का आयोजन किया गया-
- सर्वोदय कन्या विद्यालय, कुतुबगढ़, दिल्ली
- श्री राम सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल, दिल्ली रोड, मेरठ, उत्तर प्रदेश
- सर्वोदय कन्या विद्यालय, कंझावला, दिल्ली
- सनब्रीज़ पब्लिक स्कूल, सेक्टर-४५, नोएडा, उत्तर प्रदेश
- ज़िला परिषद स्कूल, सकोल, टी.क्यू शिरूर अनंतपाल, लातूर, महाराष्ट्र
- ज़िला परिषद केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय, गोविंदपुर, लातूर, महाराष्ट्र
- डॉ. रामभालचन्द्र महाविद्यालय, रविवार पेठ, अंबाजोगाई, लातूर, महाराष्ट्र
- सिद्धेश्वर स्कूल, सेक्टर-9ए, गुरुग्राम, हरियाणा
स्वामी विवेकानंद जी का कथन है “शिक्षा हमें स्वतंत्रता की और ले जाती है, जहाँ हमारी सोच की कोई सीमा नहीं होती।” इसी कथन को मध्य में रखते हुए, मंथन संस्कारशाला में बच्चों ने विभिन्न रोचक गतिविधियों के माध्यम से जैसे क्ले से गणपति बनाना, क्विज, लघु कथाएँ इत्यादि से शिक्षा व संस्कारों के महत्त्व को समझ पाए। बच्चों में रचनात्मकता व एकाग्रता को प्रोत्साहित करने हेतु value-based गतिविधियाँ भी कराई गई जैसे अल्फाबेट आर्ट, मैजिक शो, ब्रेन टीज़र गतिविधि आदि । साथ ही बच्चों ने मंथन द्वारा चलाए जा रहे दान उत्सव के विषय में भी जाना। मंथन संस्कारशाला का प्रमुख ध्येय है बच्चों को संस्कारवान बनाकर नैतिक गुणों से बच्चों के जीवन को संपन्न करना। इस माध्यम से बच्चे इस पहलू से भी अवगत हुए कि आज भी ऐसे बहुत से वर्ग हैं जो शिक्षा से वंचित हैं, ऐसे में उन्हें समाज के इन वर्गों व ऐसे पहलू के प्रति भी संवेदनशील रहना चाहिए व अपने जीवन में प्राप्त संसाधनों के लिए कृतज्ञ भी रहना चाहिए।

