दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 5 से 7 जून 2026 तक तारनतारन, पंजाब में तीन दिवसीय समर कैंप का सफल आयोजन किया गया। बच्चों को अनुशासित एवं आत्मविश्वासी व्यक्तित्व के रूप में विकसित कर समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाने के उद्देश्य से यह कैम्प रखा गया। संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य प्रेरणा से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आध्यात्मिक ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, शारीरिक स्वास्थ्य, रचनात्मकता तथा मनोरंजन का संतुलित एवं प्रेरणादायी समन्वय प्रस्तुत करना रहा।

रोचक गतिविधियों, प्रेरणादायक संवादों तथा व्यावहारिक जीवन-मूल्यों से परिपूर्ण इस शिविर ने प्रतिभागियों को ऐसे जिम्मेदार एवं संवेदनशील व्यक्तित्व के रूप में विकसित होने की प्रेरणा दी, जो आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना बुद्धिमत्ता, आत्मविश्वास और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कर सकें।
शिविर का जीवंत वातावरण उत्साह, उल्लास और बाल-सुलभ मासूमियत से सराबोर था, जहाँ विभिन्न आयु-वर्ग के बच्चों ने प्रत्येक गतिविधि में पूरे उत्साह और सहभागिता के साथ भाग लिया। प्रत्येक सत्र को इस प्रकार योजनाबद्ध किया गया कि बच्चों के लिए शिक्षा केवल सूचनात्मक न रहकर परिवर्तनकारी अनुभव बन सके। परिणामस्वरूप बच्चों ने आनंदपूर्वक प्रत्येक क्षण का अनुभव करते हुए सहज रूप से अनेक अमूल्य जीवन-मूल्यों को आत्मसात किया।

शिविर में उल्लास, ऊर्जा और उत्साह का विशेष संचार करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं रचनात्मक नृत्य प्रदर्शनों ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त शिविर में मनोरंजक खेलों, टीम-बिल्डिंग गतिविधियों, क्विज़, प्रश्नोत्तरी तथा संवादात्मक प्रतियोगिताओं की विस्तृत श्रृंखला भी आयोजित की गई, जिनका उद्देश्य सहयोग, प्रभावी संचार, नेतृत्व क्षमता तथा समस्या-समाधान जैसे महत्वपूर्ण जीवन-कौशलों का विकास करना था।
शिविर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी आयाम प्रतिदिन आयोजित होने वाले योग एवं स्वास्थ्य सत्र रहे। डीजेजेएस के प्रशिक्षित स्वयंसेवकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने योगासन, प्राणायाम, स्ट्रेचिंग अभ्यास तथा सरल ध्यान-प्रक्रियाओं का अभ्यास किया। इन सत्रों के माध्यम से उन्हें यह समझाया गया कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन एवं आंतरिक स्थिरता भी स्वस्थ एवं सफल जीवन के लिए समान रूप से आवश्यक हैं।
सभा को संबोधित करते हुए डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने आज की तीव्र गति से परिवर्तित होती दुनिया में अर्थपूर्ण जीवन-लक्ष्य निर्धारित करने तथा अनुशासित जीवनशैली अपनाने के महत्व पर प्रभावशाली विचार साझा किए। उन्होंने हमारे पवित्र ग्रंथों की दिव्य शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए बताया कि प्रत्येक बच्चे के भीतर अपार संभावनाएँ विद्यमान हैं, किन्तु इन संभावनाओं का समुचित विकास तभी संभव है जब उन्हें सही ज्ञान, श्रेष्ठ संस्कार एवं उच्च जीवन-मूल्यों का प्रकाश प्राप्त हो।
प्रवचन का एक अत्यंत प्रेरणादायी भाग युवा मनों के लिए ‘सफलता के पाँच मंत्रों’ पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया कि वे माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करें और उनकी आज्ञा का पालन करें; हानिकारक आदतों तथा नकारात्मक प्रभावों से स्वयं को दूर रखें; सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्ण एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग करें; अनावश्यक दिखावे और तुलना की प्रवृत्ति से बचें; तथा अपने प्रत्येक कार्य एवं निर्णय की व्यक्तिगत जिम्मेदारी स्वीकार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सिद्धांत विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक ही सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें संवेदनशील, जिम्मेदार और करुणामय नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में भी अग्रसर करते हैं, जो समाज के सकारात्मक निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें।
चरित्र को उपलब्धियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बताते हुए साध्वी जी ने समझाया कि वास्तविक सफलता केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता अथवा भौतिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि व्यक्ति के मूल्यों, ईमानदारी, करुणा, विनम्रता तथा आत्म-नियंत्रण की दृढ़ता से निर्धारित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे गुणों का विकास करने के लिए प्रेरित किया, जो जीवनभर उनके व्यक्तित्व को आलोकित करते रहें, न कि उन क्षणिक आकर्षणों और सुखों के पीछे भागने के लिए, जो अंततः दीर्घकालिक असंतोष का कारण बनते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक परिवर्तन सदैव भीतर से आरंभ होता है। बाहरी उपलब्धियाँ तभी स्थायी सुख और संतुष्टि प्रदान कर सकती हैं, जब उनका आधार आंतरिक शांति, आत्म-जागरूकता और आध्यात्मिक चेतना हो।
तीन दिवसीय समर कैंप का समापन अत्यंत प्रेरणादायी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जिसने मजबूत जीवन-मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता से परिपूर्ण नई पीढ़ी के निर्माण एवं पोषण के प्रति डीजेजेएस की अटूट प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। यह शिविर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-विकास और जीवन-परिवर्तन की एक प्रेरक यात्रा सिद्ध हुआ, जहाँ बच्चों ने अनुशासित जीवन, सार्थक मित्रताओं, स्वस्थ आदतों तथा उद्देश्यपूर्ण आकांक्षाओं का महत्व समझा। शिविर से प्राप्त प्रेरणा और संस्कार उन्हें भविष्य में न केवल सफल एवं जागरूक नागरिक बनने की दिशा में मार्गदर्शन देंगे, बल्कि समाज के लिए उत्तरदायी, संवेदनशील एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व के रूप में विकसित होने की भी प्रेरणा प्रदान करेंगे।