दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डी.जे.जे.एस) की महिला सशक्तिकरण एवं लैंगिक समानता प्रकल्प संतुलन के लिए स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनैतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में सच्ची स्वतंत्रता का अर्थ है आंतरिक शक्ति का जागरण और समाज में लैंगिक संतुलन की स्थापना। विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए, जिनके योगदान को पीढ़ियों से अपेक्षित सम्मान और पहचान नहीं मिल पाई। इसी भावना के साथ भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अगस्त 2026 का महीना संतुलन प्रकल्प के लिए माध्यम बना भारत की वीरांगनाओं के द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में उनके अद्वितीय त्याग एवं योगदान के प्रति जनचेतना जागृत करने का |

भारत के स्वतंत्रता संग्राम की उन विस्मृत वीरांगनाओं की प्रेरणादायी गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने की अपनी वर्षों पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, डी.जे.जे.एस संतुलन ने अगस्त 2026 में ‘Let’s Recall Their Sacrifices’ ‘याद करें क़ुर्बानी’ थीम के साथ देशभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जैसे दिल्ली, मेरठ, तरनतारन, मोगा और जयपुर सहित अनेक शहरों में ये कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अभियान के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई जैसी महान वीरांगनाओं को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिनका शौर्य और बलिदान आज की पीढ़ी के भी रोंगटे खड़े कर देता है। उनके जीवन और साहस पर आधारित प्रभावशाली जीवनीपरक प्रस्तुति के माध्यम से उनके अदम्य साहस और संघर्ष को सामने रखा गया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों में देशभक्ति की भावना को जागृत किया और भारत की वीरांगनाओं के साहस एवं जुझारूपन की याद दिलाई। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के साध्वी शिष्याओं द्वारा दिए गए संदेशों ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि भारत की स्वतंत्रता इन निर्भीक वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान से अविभाज्य है।

कार्यक्रमों में प्रीतिलता वाडेदार, कनकलता बरुआ, मातंगिनी हाजरा, झलकारी बाई, कमलादेवी चट्टोपाध्याय, दुर्गावती वोहरा, अरुणा आसफ अली, सुभद्रा कुमारी चौहान और रानी वेलु नचियार जैसी महिला क्रांतिकारियों के जीवन, साहस एवं बलिदान पर प्रेरणादायी वक्तव्य और संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए। नृत्य नाटिकाओं और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से महिला क्रांतिकारियों के अदम्य साहस, प्रगतिशील विचारधारा और नेतृत्व क्षमता को जीवंत किया गया। जागरणपरक नुक्कड़ नाटकों और प्रस्तुतियों के माध्यम से महिलाओं की दृढ़ता एवं निर्भीकता को सामने रखते हुए आज की महिलाओं को अपनी क्षमता को नए आयाम देने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही, सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने और लंबे समय से चली आ रही लैंगिक धारणाओं पर प्रश्न उठाने के लिए विभिन्न रोचक गतिविधियों एवं चिंतनपरक संवादों का आयोजन किया गया।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या एवं डी.जे.जे.एस जयपुर शाखा प्रमुख साध्वी लोकेशा भारती जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महत्वपूर्ण पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि “औपनिवेशिक शासन, आक्रमणों और लंबे समय तक चले सामाजिक उथल-पुथल के दौर में भारतीय महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए। फिर भी, अनेक प्रगतिशील महिला एवं पुरुष इन बाधाओं के विरुद्ध खड़े हुए। यह भारतीय चिंतन की उस मूल भावना को दर्शाता है, जिसमें गरिमा, समानता और प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने के समान अवसर देने का महत्व रहा है।“
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शिक्षित महिलाओं और पुरुषों ने समाज की महिलाओं को भी आंदोलन से जोड़ा, जो सामाजिक बंधनों के कारण घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। अनेक वीरों और वीरांगनाओं ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ वास्तविक स्वतंत्रता, गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जी सकें। हालांकि, पूर्ण लैंगिक समानता की दिशा में यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। लैंगिक हिंसा, भेदभाव, रूढ़िवादी धारणाएं और अदृश्य सामाजिक बंधन आज भी महिलाओं की स्वतंत्रता और उनकी क्षमता के विकास को प्रभावित करते हैं।
इसीलिए, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन और दृष्टिकोण के अनुरूप, डी.जे.जे.एस संतुलन समाज में लैंगिक समानता स्थापित करने और महिलाओं को समग्र रूप से सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य लैंगिक रूढ़ियों को चुनौती देना, भेदभावपूर्ण मानसिकता को बदलना और ऐसे भारत की कल्पना को साकार करना है, जहाँ महिलाएँ सशक्त, सम्मानित और अदृश्य सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर जीवन जी सकें।
अपने प्रत्येक अभियान, जागरूकता पहल और जनसंपर्क कार्यक्रम के माध्यम से, डी.जे.जे.एस संतुलन, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या एवं हिंदी और अंग्रेज़ी में विश्वविख्यात श्री रामकथा वाचक साध्वी दीपिका भारती जी के नेतृत्व में इस गहन सत्य को दोहराता है कि किसी राष्ट्र की स्वतंत्रता तब पूर्ण अर्थ पाती है, जब उस राष्ट्र की हर उम्र की महिला गरिमा, स्वतंत्रता और अपने असीम सामर्थ्य को साकार करने के अधिकार के साथ जीवन निर्वाह कर सकें और आध्यात्मिक जागरण इसी समग्र सशक्तिकरण की आधारशिला है।
दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में डीजे़जेएस शिक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक स्वास्थ्य, आपदा राहत और बंदी सुधार जैसे विभिन्न सामाजिक सुधार कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वभौमिक शांति, समानता और सद्भाव की स्थापना के अपने मिशन को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
याद करें क़ुर्बानी अभियान से जुड़ने और देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इन्स्ताग्रम और फेसबुक पर @DJJSSantulan को फॉलो करें और इस अभियान से ऑनलाइन जुड़ें।