मंथन- संपूर्ण विकास केंद्र, जैसा कि नाम से ही विदित है कि इस केंद्र का लक्ष्य बच्चों का संपूर्ण विकास है I “भारत” शब्द दो शब्दों से बना है भा+रत I भा का अर्थ है प्रकाश एवं रत का अर्थ है लीन होना, अर्थात भारत का शाब्दिक अर्थ जो प्रकाश में लीन हो वही भारत है I जैसे एक मकान का निर्माण एक एक ईंट से होता है परंतु उसे घर बनाता हैं उसमे रहने वाला परिवार I उसी प्रकार एक देश का निर्माण वहां के एक एक नागरिक से होता है किन्तु जब तक वहां का एक-एक नागरिक प्रकाश में लीन न हो तब तक वह देश भारत नहीं कहलायेगा I शिक्षा के महत्त्व से सभी भली-भांति परिचित हैं कि किस प्रकार शिक्षा किसी के जीवन को प्रकाश से भर सकती है I इसलिए आज हमारे देश की मांग है कि यहाँ का हर नागरिक शिक्षित हो I भारत को भारत बनाने के इसी प्रयास में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा मंथन-संपूर्ण विकास केंद्र नामक एक सामाजिक प्रकल्प की नींव रखी गयी जो अभावग्रस्त बच्चों को मूल्याधारित शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उनके संपूर्ण विकास पर कार्य कर रहा है I इसी लक्ष्य के तहत 18 अगस्त 2018 को गुरुग्राम के नवादा क्षेत्र में नए मंथन-संपूर्ण विकास केंद्र का उद्घाटन किया गया I

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलन और प्रार्थना के साथ हुआ जिसके बाद मंथन प्रकल्प की संयोजिका साध्वी दीपा भारती जी एवं दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान गुरुग्राम ब्रांच की संयोजिका साध्वी योगदिव्या भारती जी ने मुख्य अतिथियों श्री पूरण यादव ( गौशाला अध्यक्ष, गुरुग्राम ), श्री सतीश यादव ( जिला पार्षद ) और श्री वेद प्रकाश (समाज सेवक, रामपुरा ) का भव्य स्वागत किया I इसके बाद छोटे बच्चों ने मधुर प्रार्थना और मनमोहक नृत्य द्वारा सभी का मन मोह लिया I कुछ बच्चों ने फैंसी ड्रेस प्रदर्शन द्वारा भारत की अद्वितीय संस्कृति को सभी के सामने पेश किया I गुरुग्राम के दो बच्चों ने अपने निजी अभुनव साँझा करते हुए बताया कि किस प्रकार मंथन उनके जीवन में वरदान सिद्ध हुआ I इसके बाद बच्चों को मंथन बैग, बोत्तल, पाउच तथा स्टेशनरी किट वितरित की गयी I अतिथियों ने अपने प्रेरणादायक विचारों द्वारा समाज को शिक्षा का महत्त्व बताते हुए मंथन के प्रयास की भरपूर सराहना की I अंत में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के चरणों में नमन अर्पित करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ I

