ईश्वर पिपासुओं को भगवान की शाश्वत भक्ति से जोड़ने एवं आंतरिक शांति के मार्ग को प्रदानकरने हेतु गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) की नोएडा शाखा द्वारा 1 दिसम्बर 2024 को ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश में ‘भजन संध्या’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दिव्य संगीत और आध्यात्मिक प्रवचनों का मिश्रण रहा जिसने श्रद्धालुओं को आत्म-साक्षात्कार तथा आत्मिक जाग्रति के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। इस भक्तिमय कार्यक्रम में प्रभु-भक्तों, प्रमुख विभूतियों व स्थानीय प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति देखी गई।

कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए सुमधुर व भक्तिपूर्ण भजनों की भावपूर्ण शृंखला ने सबको मंत्रमुग्धकिया। दैवीय गुणों व धर्म के पथ की महिमा को उजागर करने वाली भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्म की ओर प्रेरित व प्रोत्साहित किया। डीजेजेएस की प्रवक्ता, साध्वी मणिमाला भारती जी ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों द्वारा ब्रह्मज्ञान व आत्म-साक्षात्कार की परिवर्तनकारी शक्ति को विभिन्न तथ्यों एवं उदाहरणों द्वारा उजागर किया।
साध्वी जी ने समझाया कि सच्चा सुख व शांति केवल भीतर उतरने व दिव्य प्रकाश का साक्षात्कार करने से ही प्राप्त हो सकती है। उन्होंने समझाया कि आत्म-साक्षात्कार द्वारा ही स्वयं से जुड़ने का मार्ग प्रशस्त होता है जो व्यक्ति को आध्यात्मिक जाग्रति की ओर अग्रसर करता है। तनावपूर्ण जीवनशैली की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए साध्वी जी ने जीवन में आध्यात्मिक व सांसारिक कर्तव्यों के संतुलन के महत्व को उजागर किया।

डीजेजेएस प्रतिनिधि ने ‘ब्रह्मज्ञान’ को एक अनुभवात्मक विज्ञान के रूप में वर्णित किया, जो व्यक्ति को ईश्वर का साक्षात्कार करवा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को जगा प्रेम, सद्भाव व करुणा को बढ़ावा देता है। साध्वी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्म निरीक्षण करने व समय के पूर्ण सतगुरु की दिव्य शरण प्राप्त कर आध्यात्मिक जाग्रति की ओर पहला कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वास्तविक परिवर्तन का आरंभ अपने भीतर ईश्वर के प्रत्यक्ष अनुभव से होता है,जो व्यक्ति को अज्ञानता व नकारात्मकता से मुक्त करता है।
डीजेजेएस के सोशल प्रोजेक्ट्स के विषय में बताते हुए साध्वी जी ने समझाया कि संस्थान के विभिन्नप्रकल्पों का उद्देश्य व्यावहारिक जीवन के साथ आध्यात्मिक विकास में सामंजस्य स्थापित करना है, जिसके द्वारा व्यक्ति पूर्ण व संतुलित जीवन जीने में सक्षम हो पाता है। ‘भजन संध्या’ कार्यक्रम का समापन मंगल ‘आरती’ के साथ हुआ, जिसके द्वारा सामूहिक रूप से उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
भजन संध्या कार्यक्रम ने विस्तृत रूप से मीडिया का ध्यान आकर्षित किया, जिससे कार्यक्रम का लाभ उसमें उपस्थित लोगों के साथ-साथ अन्य जिज्ञासुओं तक भी पहुँचा। इससे जनमानस में अध्यात्म के महत्व व सामाजिक उत्थान की दिशा में किए गए डीजेजेएस के अथक प्रयासों के प्रति जागरूकता फैली और अध्यात्म को अपनी दैनिक दिनचर्या में सम्मिलित करने के लिए प्रोत्साहन प्राप्त हुआ।