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5 अप्रैल 2026 को, दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रम का पावन वातावरण भक्ति और दिव्य ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के कृपामय मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा भारतीय नववर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ अत्यंत दिव्यता एवं उल्लास के साथ किया गया।

Auspicious beginning of Bhartiya Nav Varsh, Vikram Samvat 2083: Celebrated at Divya Dham, Delhi as sacred festival illuminated by divine energy of devotion, meditation & inner awakening

दिल्ली-एनसीआर से आए असंख्य साधक इस अवसर पर दिव्य धाम की दिव्य धरा पर एकत्रित हुए। उनके लिए यह नववर्ष केवल कैलेंडर का परिवर्तन नहीं था, बल्कि आत्म-जागृति, आंतरिक नवीनीकरण और जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर एक सशक्त कदम था।

वेद मंत्रों द्वारा शुभारंभ

Auspicious beginning of Bhartiya Nav Varsh, Vikram Samvat 2083: Celebrated at Divya Dham, Delhi as sacred festival illuminated by divine energy of devotion, meditation & inner awakening

कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्मज्ञानी वेद पाठियों द्वारा वैदिक मंत्रों के उच्चारण से हुआ। इन तरंगों ने वातावरण को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। तदोपरांत, भजन-संकीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचनों एवं ह्रदयस्पर्शी प्रार्थनाओं से संपूर्ण आश्रम दिव्यता से आलोकित हो उठा।

सनातन परंपरा में निहित ज्ञान 

डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने बताया कि भारतीय नववर्ष की गणना पूर्णतः वैज्ञानिक है, जो प्रकृति के चक्रों और ब्रह्मांडीय लयों के साथ सामंजस्य में होती है। वसंत ऋतु के आगमन के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व संतुलन, नवजीवन और समरसता का प्रतीक है, जो आज के अशांत युग में अत्यंत प्रासंगिक है।

उत्सव से आत्म-चिंतन की ओर

प्रवचनों में यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय नववर्ष केवल बाह्य उत्सव नहीं, अपितु आत्म जागृति द्वारा जीवन में शाश्वत नवीनता से जुड़ने का द्योतक है। जहाँ आधुनिक नववर्ष समारोह क्षणिक उत्साह तक सीमित रह जाते हैं, वहीं यह पावन आरंभ व्यक्ति को आत्मचिंतन और पुनर्संकल्प हेतु प्रेरित करता है।

ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्म-जागृति

संदेश में प्राचीन ज्ञान को समकालीन चुनौतियों से जोड़ते हुए ब्रह्मज्ञान के रूपांतरणकारी महत्व पर प्रकाश डाला गया, जिसे पूर्ण गुरु कि कृपा से प्राप्त किया जाता है। ब्रह्मज्ञान पर आधारित ध्यान साधना के माध्यम से साधक भीतर की ओर मुड़ना सीखते हैं, शाश्वत सत्य का अनुभव करते हैं और मानसिक तनाव व भौतिक अशांति से ऊपर उठते हैं। आज संसार में जहाँ लोग शांति को बाहर खोजते हैं, वहीं भारतीय नववर्ष आंतरिक शांति की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है। जब व्यक्ति भीतर से शांत हो जाता है, तब बाह्य शांति स्वतः ही आकार ले लेती है।

शुभ संकल्पवान होकर चलने के लिए साधक हुए कटिबद्ध

उच्च आदर्शों के प्रति संकल्पित ह्रदयों के साथ, सभी उत्साह से आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर होने के लिए कटिबद्ध हुए। उपस्थित ब्रह्मज्ञानी साधकों ने यह संकल्प भी लिया कि वे इस नववर्ष को आत्मिक उत्थान और जागरूक जीवनशैली के रूप में अपनाएँगे, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो सके।

सामूहिक ध्यान सत्र  

कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान सत्र से हुआ, जिसके पश्चात सभी को भोजन प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालु अपने हृदयों में भक्ति, निष्काम सेवा और नियमित ध्यान का संकल्प लेकर लौटे और इस नववर्ष को सच्चे आंतरिक जागरण की प्रेरणा के रूप में अपनाया।

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