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भगवान शिव की शाश्वत शिक्षाओं को पुनर्जीवित करने एवं श्रद्धालुओं को अमूल्य जीवन-मूल्यों को अपने आध्यात्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में आत्मसात करने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) की चाकण शाखा द्वारा 7 से 13 जनवरी 2026 तक पुणे, महाराष्ट्र में सात दिवसीय भगवान शिव कथा का भव्य आयोजन किया गया। यह विलक्षण समागम श्रद्धालुओं को आत्म-साक्षात्कार, आंतरिक परिवर्तन और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने का अद्वितीय अवसर बना। कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और भक्तिभाव से ओतप्रोत सुमधुर भजनों से हुआ, जिसके पश्चात् दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य, डॉ. सर्वेश्वर जी ने शिव तत्व के गूढ़ सार को सरल भाषा, जीवनोपयोगी उपमाओं और प्रतीकात्मक अर्थों के माध्यम से श्रद्धालुओं के समक्ष उद्घाटित किया।

Bhagwan Shiva Katha at Pune, Maharashtra rediscovered Lord Shiva’s timeless message of compassion, inner stillness & universal oneness

कथा में भगवान शिव को केवल पौराणिक देवता नहीं, बल्कि परम चेतना, संतुलन, वैराग्य और करुणा के साकार रूप में प्रस्तुत किया गया। भगवान शिव के अद्भुत स्वरुप के प्रतीकों का गूढ़ मर्म भी स्पष्ट किया गया, चंद्रमा मन पर नियंत्रण का प्रतीक है, तीसरा नेत्र आंतरिक दृष्टि का द्योतक है, सर्प भय पर विजय का संकेत है, और जटाओं से प्रवाहित गंगा पवित्रता का प्रतीक है। इन प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भगवान शिव केवल मंदिरों या मूर्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक जीव के भीतर शुद्ध चेतना के रूप में विद्यमान हैं।

कथा व्यास, डॉ. सर्वेश्वर जी ने बल दिया कि भगवान शिव की शिक्षाएँ केवल वैराग्य प्रधान नहीं हैं, बल्कि संतुलित और सार्थक जीवन जीने का व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति आत्म-जागृति से आरंभ होती है, जिसके लिए एक तत्त्ववेत्ता गुरु की शरणागति में ‘ब्रह्मज्ञान’ प्राप्त करना होता है। अनुष्ठान, भजन और पूजन तभी सार्थक हैं जब वे साधक को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाएँ। बिना अनुभव के, कर्मकांड मात्र बाह्य क्रियाएं रह जाते हैं; लेकिन आत्मज्ञान के साथ, प्रत्येक कर्म पूजा का रूप धारण कर लेता है।

Bhagwan Shiva Katha at Pune, Maharashtra rediscovered Lord Shiva’s timeless message of compassion, inner stillness & universal oneness

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं को प्रेरित किया गया कि वे शिव भक्ति के निमित्त केवल कर्मकांड तक सीमित न रहें, बल्कि सच्चे गुरु की शरणागत होकर अपने अंतर में भगवान शिव के तत्त्व रूप का साक्षात दर्शन प्राप्त करें| तदुपरांत ही भगवान शिव की अनुपम शिक्षाएँ हमारे जीवन में उतरेंगी और जीवन सरलता, सत्य और अनुशासन का पर्याय बन पाएगा। इस आयोजन को स्थानीय मीडिया से व्यापक सराहना मिली, जिसमें इसकी आध्यात्मिक गहराई, अनुशासित व्यवस्था और सामुदायिक सहभागिता को प्रमुखता से दर्शाया गया। निश्चय ही, यह कथा उपस्थितजनों के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर सिद्ध हुई, जिससे मन शुद्ध हुआ, भक्ति सुदृढ़ हुई और जीवन को नई दिशा मिली।

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