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भगवान शिव के आध्यात्मिक संदेश का प्रचार करने एवं उनके मार्गदर्शन अनुसार एक आदर्श जीवन जीने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) की संबलपुर शाखा द्वारा 25 से 31 दिसंबर 2025 तक टिटिलागढ़, ओडिशा में ‘भगवान शिव कथा’ का आयोजन किया गया। कथा का उद्देश्य समाज को अनुभवजन्य आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर करना था। सात दिवसीय कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के सिद्धांतों के अमूल्य रत्नों को संजोने के लिए एकत्रित हुए। इस आयोजन में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

Bhagwan Shiva Katha organized by DJJS at Titilagarh, Odisha highlights the Eternal Science of Self-Realisation through the Third Eye

कथा का आयोजन वैदिक मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन के साथ-साथ कथा वक्ता, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक व संचालक, डीजेजेएस) के शिष्य, डॉ. सर्वेश्वर जी के गूढ़ प्रवचनों से समृद्ध हुआ। भगवान शिव कथा विशेष रूप से ‘मंथन’ पहल को समर्पित थी, जो डीजेजेएस का एक समग्र शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वंचित बच्चों को मूल्य-आधारित शिक्षा और सर्वांगीण विकास के माध्यम से सशक्त बनाना है। शिव कथा का मंथन पहल के साथ यह समन्वय आध्यात्मिक जागृति, करुणामय सेवा तथा सामाजिक परिवर्तन की पारस्परिकता को रेखांकित करता है।

अपने प्रवचनों में डॉ. सर्वेश्वर जी ने भगवान शिव के दर्शन का गहन विवेचन प्रस्तुत किया। शिव महापुराण और वैदिक ग्रंथों के प्रसंगों की रोचक व्याख्या में उन्होंने बताया कि शिव तत्व एक जीवंत सिद्धांत है, जो व्यक्ति को आंतरिक जागृति और संतुलन की ओर प्रेरित करता है। कथा वक्ता ने समुद्र मंथन के प्रतीकात्मक स्वरूप को अहंकार और अज्ञान के विलय हेतु आवश्यक आंतरिक मंथन प्रक्रिया के रूप में स्पष्ट किया तथा भगवान शिव द्वारा विषपान को जीवन की चुनौतियों के मध्य समभाव बनाए रखने के प्रतीक के रूप में वर्णित किया।

Bhagwan Shiva Katha organized by DJJS at Titilagarh, Odisha highlights the Eternal Science of Self-Realisation through the Third Eye

डीजेजेएस प्रतिनिधि ने भगवान शिव द्वारा कही गई गुरु गीता के आधार पर पूर्ण गुरु द्वारा आत्मबोध प्राप्ति का संदेश दिया। आंतरिक जागृति हेतु ध्यान व अनुभूतिज्ञान के महत्व को रेखांकित किया। प्राचीन ज्ञान को समकालीन जीवन से सहज रूप से जोड़ते हुए, कथा वक्ता ने प्रतिभागियों को वैराग्य, करुणा और नैतिक जीवन को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. सर्वेश्वर जी ने यह स्मरण कराते हुए समापन किया कि आत्म-साक्षात्कार एक सतत यात्रा है, जो सच्चे अभ्यास और एक पूर्ण सत्गुरु के मार्गदर्शन से प्राप्त होती है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे आध्यात्मिक विकास को समाज-सेवा के साथ समन्वित करें, ताकि शिव तत्व की जीवंत भावना को साकार किया जा सके।

भगवान शिव कथा को स्थानीय मीडिया, डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म्स तथा क्षेत्रीय समाचार पत्रों द्वारा प्रकाशित किया गया। इसकी कवरेज में कार्यक्रम की आध्यात्मिक व्यापकता के साथ-साथ शिक्षा और युवा विकास के लिए समर्पित सामाजिक पक्ष को भी प्रमुखता दी गई। कथा का समापन कृतज्ञता, प्रेरणा और सतत आत्म-अन्वेषण व सेवा के संकल्प के सामूहिक भाव के साथ हुआ, जिसने उपस्थित सभी लोगों की आध्यात्मिक चेतना पर एक स्थायी प्रभाव छोड़ा।

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