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श्री गुरु पूर्णिमा प्रत्येक शिष्य के हृदय में एक विशिष्ट एवं अनुपम स्थान रखती है, क्योंकि यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु की अपार कृपा, उनकी दिव्य शिक्षाओं एवं उनके असीम अनुग्रह का भावपूर्ण स्मरण करने का परम पावन अवसर है। इसी दिव्य भावना के साथ दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 29 जुलाई 2026 को नूरमहल, पंजाब में श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन, संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पावन कमलचरणों में गहन श्रद्धा, समर्पण एवं कृतज्ञता के साथ संपन्न हुआ।

Celebrating the Eternal Guru-Shishya Bond: DJJS Organised Grand Shri Guru Purnima Mahotsav 2026 at Nurmahal Ashram, Punjab

दिव्य आध्यात्मिक स्पंदनों से ओत-प्रोत वातावरण में हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहाँ प्रत्येक प्रार्थना, प्रत्येक अर्पण और प्रत्येक क्षण सतगुरु के प्रति अटूट श्रद्धा एवं कृतज्ञता की भावपूर्ण अभिव्यक्ति बन गया। सम्पूर्ण वातावरण गुरु की दिव्य उपस्थिति के अनुभव से आलोकित था, मानो प्रत्येक हृदय उनकी असीम कृपा के स्नेहमय संरक्षण का अनुभव कर रहा हो। वास्तव में, यह महोत्सव उन अनगिनत साधकों के जीवन में गुरु की निरंतर बरसती अनंत कृपा का जीवंत उत्सव बन गया।

महोत्सव का शुभारम्भ डीजेजेएस के ब्रह्मज्ञानी वेदपाठियों द्वारा वेद मंत्रों के पावन एवं मंगलमय उच्चारण से हुआ, जिसकी दिव्य ध्वनि ने सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा, पवित्रता एवं दिव्यता से अनुप्राणित कर दिया। महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में दिव्य गुरु पूजन, मंगल आरती, प्रेरणादायी आध्यात्मिक प्रवचन, आत्मा को स्पर्श करने वाले भक्तिमय भजन तथा सामूहिक ध्यान सत्र विशेष रूप से सम्मिलित रहे।

Celebrating the Eternal Guru-Shishya Bond: DJJS Organised Grand Shri Guru Purnima Mahotsav 2026 at Nurmahal Ashram, Punjab

वैदिक मंत्रोच्चारण के उपरांत भक्तिमय भजनों की मधुर स्वर-लहरियों ने सम्पूर्ण परिसर को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक आनंद के महासागर में परिवर्तित कर दिया। प्रत्येक भजन मानो शिष्य के हृदय की भावपूर्ण अभिव्यक्ति बनकर सतगुरु के श्रीचरणों में निष्काम प्रेम, अटूट श्रद्धा एवं गहन कृतज्ञता का समर्पण कर रहा था। महोत्सव का सबसे भावविभोर करने वाला क्षण वह था जब सतगुरु के पवित्र कमलचरणों में दिव्य गुरु पूजन एवं मंगल आरती संपन्न हुई। हाथ जोड़कर एवं कृतज्ञता से परिपूर्ण हृदय के साथ श्रद्धालुओं ने गुरुदेव को सादर नमन किया। उन धन्य एवं अविस्मरणीय क्षणों में प्रत्येक आत्मा ने स्वयं को गुरु की अनंत कृपा, स्नेह एवं दिव्य संरक्षण के आलिंगन में अनुभव किया।

इस दिव्य आध्यात्मिक समागम को डीजेजेएस प्रतिनिधि साध्वी वैष्णवी भारती जी, साध्वी तपस्विनी भारती जी, साध्वी मनस्विनी भारती, स्वामी सज्जनानंद जी और स्वामी मोहनपुरी जी के प्रेरणादायी एवं ओजस्वी प्रवचनों ने और अधिक गरिमामय एवं दिव्य बना दिया। उन्होंने शास्त्रों के प्रेरक प्रसंगों, संत परंपरा के अमूल्य उदाहरणों तथा जीवन के वास्तविक अनुभवों के माध्यम से गुरु-शिष्य संबंध की सनातन महिमा का अत्यंत हृदयस्पर्शी वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि गुरु की करुणा एवं कृपा समस्त सांसारिक सीमाओं से परे होती है। वह केवल इस जीवन में ही नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर तक शिष्य का मार्गदर्शन, संरक्षण एवं आध्यात्मिक उत्थान करती है। वक्ताओं ने अनेक दिव्य प्रसंगों का उल्लेख करते हुए यह रेखांकित किया कि अटूट श्रद्धा, पूर्ण आज्ञापालन एवं संपूर्ण समर्पण ने युगों-युगों से शिष्यों को गुरु की असाधारण कृपा का पात्र बनाया है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को यह भी स्मरण कराया कि गुरु की कृपा किसी सांसारिक मापदंड की मोहताज नहीं होती; वह विनम्रता, श्रद्धा एवं समर्पण के साथ साधना करने वाले प्रत्येक सच्चे साधक पर निरंतर बरसती रहती है। सच्चा शिष्यत्व बाह्य आडंबरों में नहीं, बल्कि गुरु की आज्ञा के प्रति दृढ़ निष्ठा, सच्चे ध्यान, निःस्वार्थ सेवा तथा अटूट श्रद्धा में प्रकट होता है।

श्री आशुतोष महाराज जी के प्रचारक गणों ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में यह भी स्मरण करवाया कि संसार का कोई भी संबंध गुरु की अनन्य करुणा, असीम दया एवं निःस्वार्थ प्रेम की बराबरी नहीं कर सकता। सतगुरु अपने प्रत्येक शिष्य के आध्यात्मिक उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत रहते हैं तथा उनका मार्गदर्शन केवल इस जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि असंख्य जन्मों तक उनका संरक्षण एवं पथ-प्रदर्शन करते रहते हैं। ऐसी अपरिमेय एवं अनिर्वचनीय कृपा का प्रतिदान वास्तव में कभी नहीं किया जा सकता; इसे केवल सच्ची कृतज्ञता, पूर्ण समर्पण तथा गुरु के दिव्य उपदेशों के प्रति अटूट निष्ठा एवं आज्ञापालन के माध्यम से ही चुकाया जा सकता है।

इस पावन एवं भव्य आयोजन को अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने और भी गौरव प्रदान किया अपनी उपस्थित दे कर। उन्होंने भी श्रद्धालुओं के साथ सतगुरु के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा, भक्ति एवं कृतज्ञता सादर अर्पित की।

गुरु पूर्णिमा महोत्सव का समापन सामूहिक ध्यान सत्र के साथ हुआ, जहाँ हजारों श्रद्धालु सच्ची प्रार्थना में एकात्म होकर विश्व शांति, वैश्विक सद्भाव तथा समस्त मानवता के कल्याण की मंगलकामना में लीन दिखाई दिए। सामूहिक ध्यान के उपरांत विशाल सामुदायिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें समर्पित स्वयंसेवकों ने विनम्रता, आत्मीयता एवं निःस्वार्थ सेवा-भाव से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।

इस पावन एवं प्रेरणादायी आयोजन को पंजाब के प्रमुख प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी व्यापक कवरेज प्राप्त हुई, जिनमें दैनिक भास्कर, द ट्रिब्यून, दैनिक जागरण, दैनिक सवेरा, द सवेरा, पंजाब केसरी इत्यादि प्रमुख रूप से सम्मिलित हैं। इसके माध्यम से गुरु की दिव्य शिक्षाओं, आध्यात्मिक मूल्यों एवं मानवता के कल्याण का संदेश समाज के व्यापक जनसमूह तक पहुँचा।

वास्तव में, श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2026 केवल एक धार्मिक अथवा आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि प्रत्येक श्रद्धालु के अंतर्मन में भक्ति की नवचेतना, गुरु के प्रति गहन कृतज्ञता, निःस्वार्थ सेवा के प्रति और अधिक समर्पण तथा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा आलोकित आध्यात्मिक मार्ग पर दृढ़ निष्ठा एवं अटूट विश्वास के साथ निरंतर अग्रसर रहने के संकल्प को पुनः जागृत करने वाला एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक महापर्व सिद्ध हुआ।

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