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संस्कारशाला, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के समग्र शिक्षा प्रयास मंथन- सम्पूर्ण विकास केन्द्र द्वारा एक विशेष मासिक पहल है, जो 4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समृद्धि प्रदान करने वाला मंच है। यह पहल युवा मस्तिष्कों को शाश्वत गुणों और भावनात्मक दृढ़ता से आकार देने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है। इन सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा का समावेश किया जाता है।

Character Building Sanskarshala - DJJS Manthan SVK | February 2026

इस माह मंथन-SVK द्वारा द्वारा संस्कारशाला का विषय विविध आयामों को समाहित करते हुए इस प्रकार निर्धारित किया गया कि छात्रों में मूल्य-आधारित शिक्षा एवं समग्र विकास को प्रोत्साहन मिले। इस सुनियोजित दृष्टिकोण ने बौद्धिक विकास के साथ-साथ नैतिक जागरूकता को सुदृढ़ किया। सार्थक सहभागिता के माध्यम से छात्रों को अपने दैनिक आचरण में मूल्यों के समन्वय हेतु मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे उनमें स्पष्टता, उत्तरदायित्व एवं संतुलित व्यवहार का विकास हुआ।

फ़रवरी 2026 में, कुल 41 संस्कारशाला कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे DJJS की सभी शाखाओं में लगभग 1963 बच्चों को लाभ हुआ, जिनमें NRI बच्चे और देश भर के विभिन्न स्कूलों के छात्र शामिल थे।

Character Building Sanskarshala - DJJS Manthan SVK | February 2026

1. दिल्ली

  • फर्स्ट मार्क पब्लिक स्कूल, बुराड़ी

2. मध्य प्रदेश

  • हायर सेकेंडरी स्कूल, बाड़ी, ग्वालियर

3. उत्तर प्रदेश

  • श्री रेशमा देवी स्कूल, बरेली
  • प्राइमरी स्कूल, शिकारपुर, बुलंदशहर

इस माह संस्कारशाला एक प्रमुख आधार स्तंभ के रूप में उभरी, जिसके अंतर्गत मंथन SVK द्वारा विविध उद्देश्यपूर्ण एवं सुव्यवस्थित गतिविधियों का संचालन किया गया। संस्कारशाला सत्रों को विभिन्न विषयों के मिश्रण के साथ सावधानीपूर्वक संरचित किया गया था ताकि छात्रों में समग्र विकास को बढ़ावा देते हुए मूल्य-आधारित शिक्षा को पोषित किया जा सके।

सुविचारित वीडियो मॉड्यूल्स के माध्यम से जीवन के दैनिक निर्णयों एवं उनके दीर्घकालिक प्रभावों को सहज एवं प्रासंगिक रूप में प्रस्तुत किया गया। सहभागितापूर्ण गतिविधियों एवं मार्गदर्शित चर्चाओं ने चिंतन एवं गहन समझ को बढ़ावा दिया, जिससे छात्रों में विवेकपूर्ण चिंतन एवं नैतिक मूल्यों के अनुरूप आचरण की प्रवृत्ति विकसित हुई। साथ ही, आत्म-नियंत्रण, सजगता एवं संतुलित निर्णय-निर्माण हेतु व्यावहारिक तकनीकों का समावेश किया गया।

इन सत्रों द्वारा जागरूकता, उत्तरदायित्व एवं परिष्कृत आचरण को सुदृढ़ किया, और संस्कारशाला मूल्यों एवं स्पष्ट विचारों से युक्त जागरूक और विवेकशील व्यक्तित्वों के निर्माण में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में निरंतर योगदान दे रही है। सत्र की समाप्ति शांतिमंत्र और प्रार्थना के साथ हुई। सभी ने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पवित्र कमल चरणों में अपना विनम्र प्रणाम अर्पित किया।

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