दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा, दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की कृपा से, 21 से 25 फरवरी 2026 तक सनीबैंक, क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया में भगवान शिव कथा का आयोजन किया गया। पाँच दिवसीय इस पावन कथा में क्षेत्रभर से श्रद्धालु और साधक पधारे, जो भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने तथा पवित्र शास्त्रों के दिव्य ज्ञान में स्वयं को निमग्न करने हेतु एकत्रित हुए।

गुरुदेव के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों ने कथा स्थल को भक्तिमय तरंगों से सराबोर कर दिया। इससे ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ जिसने श्रोताओं के हृदयों को कथा की गूढ़ शिक्षाएँ आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।
कथा का भावपूर्ण और प्रवाहपूर्ण वाचन डॉ. सर्वेश्वर जी (दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य) द्वारा किया गया। उन्होंने शिव महापुराण की दिव्य कथाओं को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। संस्कृत श्लोकों, शास्त्रीय संदर्भों और रोचक प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने भगवान शिव के जीवन और प्रतीकों में निहित गहरे आध्यात्मिक अर्थों को उजागर किया। अपने प्रवचनों में उन्होंने प्राचीन शास्त्रों की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ते हुए उनकी शाश्वत प्रासंगिकता को स्पष्ट किया।

डॉ. सर्वेश्वर जी ने गहन सत्यों को सरल और सुंदर शैली में प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को भक्ति, आत्म-साक्षात्कार और आंतरिक रूपांतरण के मार्ग का मर्म समझाया। उन्होंने भक्ति और ध्यान द्वारा अंतःशुद्धि के महत्व पर ज़ोर दिया। भगवान शिव के स्वरूप के प्रतीकात्मक अर्थ को समझाते हुए उन्होंने बताया कि महादेव की ध्यानमग्न मुद्रा आंतरिक स्थिरता का प्रतीक है तथा तीसरा नेत्र जागृत आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है, जो अज्ञान और माया का विनाश करता है।
कथा में यह स्पष्ट किया गया कि भगवान शिव की भक्ति केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह आत्मा को शुद्धता, वैराग्य और मोक्ष की ओर ले जाने वाला मार्ग है।
प्रवचन में यह रेखांकित किया गया कि भौतिक दौड़, निरंतर व्याकुलता और बढ़ती मानसिक बेचैनी से युक्त वर्तमान युग ने मानवता को आंतरिक शांति से दूर कर दिया है। आधुनिक प्रगति के बावजूद लोग प्रायः असंतोष और मानसिक अशांति से घिरे रहते हैं। ऐसे में, भीतर स्थित ईश्वर की दिव्यता से जुड़कर ही व्यक्ति जीवन में वास्तविक सुख व शांति प्राप्त कर सकता है।
कथा कार्यक्रम में आगे बताया गया कि आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक सच्चे आध्यात्मिक गुरु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी आज विश्वभर में ब्रह्मज्ञान (दिव्य ज्ञान) का प्रसार कर रहे हैं, जिससे लोग मानव जीवन के उच्च उद्देश्य को समझकर संतुलित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जीवन जी सकें। ब्रह्मज्ञान की पवित्र दीक्षा द्वारा साधकों को ध्यान की शाश्वत विधि प्राप्त होती है, जिससे वे बाहरी उलझनों से ऊपर उठकर स्थायी आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।
कथा अत्यंत प्रेरणादायक संदेश के साथ संपन्न हुई, जिसमें सभी आगंतुकों को ब्रह्मज्ञान के माध्यम से आंतरिक दिव्यता का अनुभव करने के लिए हार्दिक निमंत्रण दिया गया। श्रोताओं ने इस ज्ञानवर्धक संदेश और भक्ति प्रस्तुतियों की सराहना की। अनेक उपस्थितजनों ने डीजेजेएस से जुड़े रहने और भविष्य में होने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने में गहरी रुचि व्यक्त की, जो इस दिव्य और अलौकिक आयोजन की स्थायी छाप को दर्शाता है।