मंथन संपूर्ण विकास केंद्र में शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, संस्कार एवं आंतरिक जागरूकता के संतुलित विकास की एक परिवर्तनकारी यात्रा के रूप में देखा जाता है। परम पूज्य श्री आशुतोष महाराज जी की दिव्य प्रेरणा से संचालित यह पहल बच्चों में अनुशासन, संवेदनशीलता, जिज्ञासा एवं मानवीय मूल्यों को विकसित करने हेतु निरंतर कार्यरत है। भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समकालीन शिक्षण दृष्टि के समन्वय के साथ मंथन SVK बच्चों को उद्देश्यपूर्ण, आत्मविश्वासी एवं उत्तरदायी नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान करता है।

अप्रैल 2026 में मंथन- सम्पूर्ण विकास केंद्र ने विविध ऑनलाइन एवं ऑफलाइन गतिविधियों का सफल आयोजन करते हुए 966 से अधिक विद्यार्थियों तक अपनी पहुँच बनाई। इस अवधि में आयोजित कार्यशालाओं एवं गतिविधियों ने शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण जागरूकता, सांस्कृतिक चेतना एवं व्यवहारिक जीवन-कौशलों को समग्र रूप से स्पर्श किया।
संस्कारशाला सत्रों में “Personal Hygiene - स्वच्छ आदतें श्रेष्ठ संस्कार” विषय के माध्यम से बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, अनुशासन एवं स्वस्थ जीवनशैली के महत्व से परिचित कराया गया। गतिविधियों एवं संवादात्मक चर्चाओं द्वारा हाथों की स्वच्छता, आत्म-देखभाल एवं साफ-सुथरी आदतों को उत्तम चरित्र एवं जिम्मेदार जीवन का आधार बताया गया।

अलंकृता श्रृंखला का विषय “सुर + भक्ति = सूरदास” रहा, जिसमें संत कवि सूरदास जी की श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति एवं काव्य माधुर्य को भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों तक पहुँचाया गया। संगीत, भक्ति एवं अध्यात्म के समन्वय ने प्रतिभागियों को भारतीय भक्तिकालीन विरासत से जोड़ने का कार्य किया।
पर्यावरण चेतना एवं व्यवहारिक कौशलों को प्रोत्साहित करने हेतु SUPW कार्यशाला के अंतर्गत Basics of Sewing and Mending सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों को सिलाई एवं वस्तुओं के पुनः उपयोग की आधारभूत जानकारी दी गई। इस गतिविधि ने सतत जीवनशैली एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित की।
भारत गौरव गाथा – आओ करें भारत की सैर श्रृंखला में विद्यार्थियों ने कर्नाटक स्थित संस्कृत-भाषी ग्राम मत्तूर की सांस्कृतिक विशेषताओं को जाना। संस्कृत एवं वैदिक परंपरा को जीवंत रूप से संरक्षित करने वाला यह ग्राम भारत की सांस्कृतिक चेतना एवं भाषाई विरासत का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।
पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल आदतों के प्रति प्रेरित किया गया। रचनात्मक गतिविधियों एवं चर्चाओं ने बच्चों में पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता का भाव जागृत किया।
मंथन विद्यार्थियों के लिए हर्षोल्लासपूर्ण जन्मदिवस समारोह भी आयोजित किए गए, जिनमें स्नेह, अपनत्व एवं सामूहिक आनंद का सुंदर वातावरण देखने को मिला। इन आयोजनों ने बच्चों में आत्मीयता, मित्रता एवं सामुदायिक जुड़ाव की भावना को और सुदृढ़ किया।
सर्वे से बच्चों में अवलोकन, संवाद एवं विश्लेषणात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया गया। सहभागितापूर्ण अभ्यासों ने बच्चों को जानकारी संकलन, विचार अभिव्यक्ति एवं टीमवर्क जैसे व्यवहारिक कौशलों से परिचित कराया।
इसके अतिरिक्त Parent-Teacher Meeting (PTM) का आयोजन भी किया गया, जिसमें अभिभावकों एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, व्यवहार एवं समग्र विकास पर सार्थक संवाद किया। इस पहल ने घर एवं शिक्षण वातावरण के मध्य सहयोगात्मक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाया।
