ग्रामीण बिहार में समग्र शिक्षा के नव-संकल्प के साथ, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान का समग्रशिक्षा प्रकल्प मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र ने हाल ही में राज्य में संचालित अपने चारों शिक्षण केंद्रोंका वार्षिक निरीक्षण संपन्न किया। इस यात्रा में कार्यक्रम की संयोजिका साध्वी दीपा भारती जी, व उनकी दिल्ली मुख्यालय की टीम ने प्रत्येक मंथन केंद्र में नई चेतना, नव-स्फूर्ति और नवीन उद्देश्यका संचार किया।

निरीक्षण के अंतर्गत बोधगया के ग्राम बकरौर, सहरसा के ग्राम पदमपुर, सुपौल के ग्राम परसौनी, तथा महिषी प्रखंड के ग्राम धनौज धरमपुर के चार क्षेत्रों के मंथन विद्यालयों का दौरा किया गया—जिनमें से धनौज धरमपुर एक ऐसा ग्राम है जहाँ एकमात्र मंथन - सम्पूर्ण विकास केंद्र ही शिक्षा कादीप जलाए हुए है।
इस यात्रा की सबसे हर्षप्रद उपलब्धि रही — धनौज धरमपुर केंद्र का स्थायी स्कूल निर्माण काशुभारंभ, जो वर्षों से अस्थायी ढांचे में संचालित हो रहा था। आप प्रायोजकों व शुभचिंतकों केसहयोग से 18 अप्रैल 2025 को इस नवीन मंथन स्कूल का भूमिपूजन एवं हवन यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें दिव्य ज्योति वेद मंदिर के ब्रह्मज्ञानी वेदपाठियों ने वैदिक विधि से पूजन किया। इस पावनअवसर पर स्वामी यादवेंद्रानंद जी, साध्वी शरवानी भारती जी, साध्वी दीपा भारती जी, साध्वी ज्योतिभारती जी तथा साध्वी नेहा भारती जी सहित ग्रामवासी, कार्यकर्ता एवं मंथन स्कूल के विद्यार्थी साक्षीबने।

उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका से ग्रसित रहता है, अतः स्थायी भवन न केवल शिक्षाकी निरंतरता सुनिश्चित करेगा, अपितु विद्यार्थियों हेतु एक सुरक्षित, सशक्त और आश्वस्त वातावरणभी प्रदान करेगा।
इसी क्रम में 16 अप्रैल 2025 को ग्राम बकरौर, बोधगया में महिलाओं के उत्थान हेतु दो विशेषपहलों का आरम्भ हुआ।
पहला—प्रौढ़ शिक्षा शिविर, जहाँ ग्रामीण महिलाओं को पढ़ना, लिखना व हस्ताक्षर करना सिखायागया। उद्देश्य यह था कि निरक्षरता के अंधकार में जी रहीं माताएँ-बहनें, अब अपने नाम से दुनिया कोजान सकें एवं जो थोड़ा बहुत जानती थीं, वह ज्ञान उनके जीवन का सहायक बन सके।
दूसरा—‘प्रशिक्षण सिलाई केंद्र’ का उद्घाटन हुआ, जिसमें लगभग 25–30 महिलाएँ लाभान्वित हुई।उन्होंने सिलाई, कपड़े की कटिंग और मशीन संचालन का व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया। जब उनसेपूछा गया तो उन्होंने भावविभोर होकर कहा — "मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र ने हमारे गाँव में यह जोअवसर दिया है, वह न केवल हमें सिखा रहा है, बल्कि भविष्य में कमाई का साधन भी बन सकताहै।"
विद्यालयों के निरीक्षण में यह भी देखा गया कि बच्चों में व्यक्तिगत स्वच्छता की जागरूकता, नियमित उपस्थिति, और पाठ्यचर्या के प्रति उत्साह में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। साथ ही नव-प्रवेशों कीसंख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई।
20 अप्रैल 2025 को संपूर्ण बिहार शिक्षकों हेतु एक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियाँ, वार्षिक पाठ्यक्रम योजना, तथा प्रेरक प्रार्थना-सभा कार्यक्रमपर विमर्श हुआ। यह सत्र आने वाले शैक्षणिक वर्ष के लिए आनंदपूर्ण, सहभागी और समग्र शिक्षणवातावरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
इस यात्रा के साथ, मंथन सम्पूर्ण विकास केंद्र ने एक बार पुनः यह सिद्ध कर दिया कि—
हर गाँव, हर बच्चा, हर स्त्री और हर इकाई— राष्ट्र निर्माण की एक सजीव आशा है।
और मंथन - सम्पूर्ण विकास केंद्र उसी आशा का नाम है। थैंक्यू मंथन- थैंक्यू महाराज जी।
