सामाजिक रूप से हम वर्तमान में कई विफलताओं एवं समस्याओं से जूझ रहे हैं। तथापि इसके पीछे स्तिथ मूल कारण से हम पूर्णतया अनभिज्ञ है। इसका मूल कारण है - अहंकार। भगवान श्री कृष्ण ने स्पष्ट कहा है कि हमारे भीतर स्तिथ अहंकार ही सभी दुविधाओं एवं भ्रम का कारण है। अहंकार के कारण ही हमारे भीतर अज्ञानता एवं भय उत्पन्न होता है और हमारी बुद्धि इन्हीं के मध्य घिरी रहती है। भौतिक दृष्टि से देखा जाए तो आज कोई ऐसी युक्ति नहीं है जिससे इन्हें समाप्त किया जा सके। किन्तु, भगवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने ब्रह्मज्ञान के रूप में एक ऐसा अचूक उपाय दिया है जिससे हम अहंकार रुपी दानव से अपनी रक्षा कर सकते हैं। ब्रह्मज्ञान से न केवल हम अपने अहंकार पर विजय पा सकते हैं अपितु उससे उत्पन्न विवेक एवं ज्ञान से हम जीवन की प्रत्येक बाधा को पार कर एक विजयी योद्धा बन सकते हैं।

हमारे संत- महापुरुषों ने यह स्पष्ट किया है कि जो भी व्यक्ति पूर्ण एकाग्रता एवं उत्साह के साथ भागवत कथा श्रवण करता है वह स्वतः ही ब्रह्मज्ञान प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। ब्रह्मज्ञान के इसी पावन सन्देश को जन-मानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिनांक 22 से 28 नवंबर तक मयूर विहार, दिल्ली में सात-दिवसीय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से एक दिन पूर्व दिनांक 21 नवंबर 2019 को संस्थान द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गयी जिसमें हज़ारों महिला श्रद्धालुओं ने मंगल कलश को शिरोधार्य कर इस पुनीत कार्यक्रम का आगाज़ किया। डीजेजेएस की इस दिव्य पहल का उद्देश्य जन-मानस में आध्यात्म, प्रेम,एवं सद्भावना के सन्देश को प्रसारित करना है।
कथा व्यास साध्वी वैष्णवी भारती जी द्वारा हमारे धर्म ग्रथों में निहित दिव्य संदेशों का सुन्दर व्याख्यान किया गया। ओजस्वी विचारों एवं मधुर स्वर लहरियों ने सम्पूर्ण वातावरण में दिव्यता एवं सकारात्मकता की अनुपम आभा बिखेरी। संस्कार चैनल में दिनांक 25 नवंबर से 1 दिसंबर, 2019 तक इस अनूठे कार्यक्रम को प्रसारित किया गया। साथ ही साथ दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स, विजय न्यूज़, ह्यूमन इंडिया, न्यूज़ 18 स्टूडियो, वीर अर्जुन, गुड़गांव टुडे, दैनिक खबरे, भारत दर्शन आदि विभिन्न प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने इस कार्यक्रम को कवर किया एवं सभी ने संस्थान के कार्यों की भूरी प्रशंसा की।

कार्यक्रम में साध्वी जी ने एक पूर्ण सतगुरु एवं शिष्य के दिव्य सम्बन्ध की बहुत सुन्दर व्याख्या की। कृष्ण की दिव्य लीलाओं में से एक रास लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि प्रेम एवं पवित्र हृदय के अभाव में रास लीला को समझना असम्भव है। पूर्ण समर्पण से ही प्रभु के प्रेम को पाया जा सकता है। जब एक शिष्य अपने गुरु के चरणों में पूर्ण समर्पण करता है तब अपने भीतर के विकारों एवं भ्रांतियों को समाप्त कर परमात्मा से तारतम्यता स्थापित कर पाता है। ऐसा ही प्रेम एवं समपर्ण गोप- गोपियों ने किया था। उनके प्रेम में कोई मांग नहीं थी। उन्होंने केवल ईश्वर से ही प्रेम किया एवं सदैव उनकी दिव्य अनुभूति की ही कामना की। साध्वी जी ने बताया कि जिस प्रकार द्वापर युग में श्री कृष्ण ने ब्रह्मज्ञान द्वारा गोप-गोपियों को आत्म जाग्रत किया था ठीक उसी प्रकार गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ने वर्तमान में अनेकों भक्त श्रद्धालुओं को यह महान ब्रह्मज्ञान प्रदान किया है।
कार्यक्रम में डीजेजेएस द्वारा संचालित "मंथन" प्रकल्प के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। मंथन एक समग्र शिक्षा कार्यक्रम है जो कमज़ोर एवं सामजिक रूप से वंचित बच्चों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत है। इसके अतिरिक्त संस्थान के विभिन्न समाजिक प्रकल्पों को प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया गया। प्रदर्शनी में सेवादारों को लगन एवं निष्ठा से निस्वार्थ सेवा करते भी दिखाया गया जिससे यह स्पष्ट है कि एक आत्म जागृत व्यक्ति समाज के उत्थान एवं कल्याण के लिए सदैव अग्रणी रहता है। सभी ने इस कार्यक्रम का पूर्ण आनंद उठाया।