संस्कारशाला, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के समग्र शिक्षा प्रयास मंथन-सम्पूर्ण विकास केन्द्र द्वारा एक विशेष मासिक पहल है, जो 4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए समृद्धि प्रदान करने वाला मंच है। यह पहल युवा मस्तिष्कों को शाश्वत गुणों और भावनात्मक दृढ़ता से आकार देने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है। इन सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा का समावेश किया जाता है।

इस माह, मंथन SVK ने "फूड हाइजीन - स्वच्छ आदतें श्रेष्ठ संस्कार" विषय पर एक ज्ञानवर्धक संस्कारशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली की प्रथाओं के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना था। इन सत्रों ने बच्चों को यह समझने में सहायता की, कि किस प्रकार स्वच्छ खान-पान की आदतें और अनुशासित दिनचर्या उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण में योगदान देती है।
मई 2026 में, कुल 68 फूड हाइजीन संस्कारशाला कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे DJJS की सभी शाखाओं में लगभग 2230 बच्चों को लाभ हुआ, जिनमें NRI बच्चे और देश भर के विभिन्न स्कूलों के छात्र शामिल थे।

1. हरियाणा
- GBN स्कूल, फरीदाबाद
- लिटिल स्टार्स प्ले स्कूल, पलवल
- श्री गौरी दत्त अग्रवाल कॉन्वेंट स्कूल, रेवाड़ी
2. उत्तर प्रदेश
- आर.पी.एम. चिल्ड्रेन्स एकेडमी, बरेली
- सरस्वती ज्ञान मंदिर, बरेली
- प्राथमिक विद्यालय, हाथरस
- होली चाइल्ड पब्लिक जूनियर हाई स्कूल, हापुड़
- प्राथमिक विद्यालय, शाहजहाँपुर
खाद्य स्वच्छता पर इस माह का विशेष ध्यान (thematic emphasis) मंथन द्वारा संचालित कई मूल्य-उन्मुख पहलों और विचारपूर्वक तैयार की गई गतिविधियों का मुख्य आधार बना:
- अनिवार्य स्वच्छता और सचेत जागरूकता (Mindfulness): संवादात्मक चर्चाओं और कहानी आधारित वीडियो के माध्यम से, प्रतिभागियों ने हाथ धोने, नाखूनों को साफ रखने और भोजन के लिए एक स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के महत्व को जाना। बच्चों को भोजन के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना विकसित करने के लिए प्रार्थना के साथ भोजन शुरू करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
- स्वस्थ खान-पान और पाचन: सत्रों में शांतचित्त होकर, बैठकर भोजन करने, बेहतर पाचन के लिए भोजन को ठीक से चबाने और समग्र स्वास्थ्य के समर्थन के लिए भोजन के नियमित समय को बनाए रखने के लाभों पर बल दिया गया।
- बुद्धिमत्तापूर्ण खाद्य चयन और उपभोक्ता जागरूकता: बच्चों को ताजे फलों व सब्जियों को धोने, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों पर समाप्ति तिथि (expiry date) की जांच करने और शाकाहारी (vegetarian) लेबलों की पहचान करने के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। उन्हें खाद्य जनित बीमारियों से बचाव के लिए खाद्य मिलावट की पहचान करने के सरल तरीकों से भी परिचित कराया गया, साथ ही जंक फूड के स्थान पर पौष्टिक प्राकृतिक खाद्यों को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- दैनिक स्वच्छता और व्यावहारिक उत्तरदायित्व: विद्यार्थियों को ढके न गए भोजन, या भोजन के दौरान मोबाइल और टी.वी. जैसे उपकरणों के उपयोग से होने वाले संदूषण (contamination) के जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। अनुशासन और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के लिए व्यावहारिक "रविवार के नियम" (Sunday rules) की एक श्रृंखला पेश की गई, जिसने बच्चों को अपने कमरों को व्यवस्थित करने, योग करने, पौधों की देखभाल करने और परिवार के साथ सार्थक समय बिताने के लिए प्रेरित किया।
सत्र की समाप्ति शांतिमंत्र और प्रार्थना के साथ हुई। सभी ने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी केपावन चरण कमलों में कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सादर प्रणाम किया और उनकी दिव्य कृपा एवं आशीर्वाद की प्रार्थना की।
