प्राचीन ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और युवा संस्कृति के एक जीवंत संगम का प्रदर्शन करते हुए, पीस प्रोग्राम ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में “गीता-ओ-लॉजी फॉर जेन ज़ी: मॉडर्न अर्जुन… हाउज़ द जोश?” नामक एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया।

सैकड़ों युवाओं, छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स की उपस्थिति वाले इस कार्यक्रम में भगवद् गीता की व्यावहारिक शिक्षाओं को प्रस्तुत किया गया, ताकि वे आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकें।
कार्यक्रम का पहला सत्र “वेक-अप शंखनाद” पीस प्रोग्राम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी डॉ. निधि भारती जी के नेतृत्व में आयोजित हुआ। यह युवाओं से जुड़ने वाला एक ऊर्जावान सत्र था, जिसमें हास्य, मनोरंजक गतिविधियां और गहरी बातचीत शामिल थी। इसका उद्देश्य जेन ज़ी (Gen Z) को उनकी मानसिक बाधाओं को पहचानने और आत्म-जागरूकता को हासिल करने में मदद करना था। उन्हें ब्रह्मज्ञान मेडिटेशन का दैनिक अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे डिजिटल एडिक्शन, रिलेशनशिप डिलेमा, करियर कन्फ्यूजन, डोपामाइन लूप्स, और अन्य ऐसी समस्याओं से निपट सकें।

इसके बाद “लाइव पॉडकास्ट - चैट एंड चिंतन” का आयोजन हुआ, जहां तर्क और आध्यात्मिकता का अनोखा मेल देखने को मिला। प्रसिद्ध यूपीएससी कोच और शिक्षक श्री अवध ओझा जी ने अपने बेबाक और सिग्नेचर अंदाज में 'तर्क बाइट्स' साझा करते हुए जेन ज़ी से संवाद किया। उन्होंने युवाओं को अकादमिक और जीवन के दबावों के बीच विश्लेषण करने व मानसिक मजबूती विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
इसी के साथ, पीस प्रोग्राम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर साध्वी तपेश्वरी भारती जी ने वैज्ञानिक प्रयोगों, मनोवैज्ञानिक वार्ताओं और लाइव इंटरैक्टिव प्रदर्शनों के माध्यम से सनातन ज्ञान को डिकोड करते हुए 'गीता बाइट्स' साझा कीं। उन्होंने बताया कि भगवद् गीता के अनुसार, अशांत मन को मास्टर करने और चुनौतियों से उबरने के लिए पूर्ण सतगुरु (Perfect Spiritual Master) से ब्रह्मज्ञान ध्यान की परम विद्या प्राप्त करना आवश्यक है। इस सत्र से उजागर हुआ कि गीता के सिद्धांत किस प्रकार आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं।
दोनों वक्ताओं ने मिलकर युवाओं को अपने नैतिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन की समस्याओं का सामना करने के लिए प्रेरित किया।
पीस प्रोग्राम की फेसिलिटेटर साध्वी परमा भारती जी ने “जैमिंग एंड झूमिंग” नामक एक उच्च-ऊर्जा वाले नृत्य सत्र का संचालन किया। सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाते हुए, इस सत्र में पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के पारंपरिक लय का मिश्रण प्रस्तुत किया गया। इन सभी नृत्य प्रस्तुतियों में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों को दर्शाया गया था।
कार्यक्रम का समापन एक ऊर्जावान जैम सेशन के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके साथ ही, "गणपति बप्पा मोरया" के जयकारों के बीच गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में एक उत्साहपूर्ण शोभायात्रा निकाली गई। जेन ज़ी ने आंतरिक आनंद से सराबोर होकर नृत्य किया और उत्सव मनाया।
कुल मिलाकर, युवा दर्शकों को मनोरंजन, सीख और प्रेरणा का एक अनूठा संगम मिला। उन्हें ऐसे प्रैक्टिकल और आसान उपाय मिले जिन्हें अपनाकर वे डिजिटल डिस्ट्रेक्शंस के बावजूद अपने मन को खुश रख सकें और अपने काम पर फोकस कर सकें।
सभी की ओर से अत्यधिक प्रशंसा पाने वाले इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि प्राचीन जीवन-दर्शन आज के आधुनिक समय में भी बहुत बड़ी सीख है।