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संस्थान हर महीने आध्यात्मिक कार्यक्रमों द्वारा जनमानस में सामाजिक कर्तव्यों व जीवन के लक्ष्यों के प्रति नवीन उत्साह का संचार करता है| इसी श्रृंखला में 14 मई को संस्थान के नूरमहल आश्रम में विशाल आध्यात्मिक समागम व भंडारे का कार्यक्रम आयोजित किया गया| सुमधुर भजनों ने भावपूर्ण समां बाँध दिया तो वहीं सत्संग विचारों ने गुरु भक्ति को गति प्रदान की| सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्यों व शिष्याओं ने शास्त्र ग्रंथों के आधार पर आधुनिक समाज की ज्वलंत समस्याओं का निदान रखा| उन्होंने बताया कि बाहर के नियम-कानून, समाज सुधार के कार्य तब तक मानव व् समाज में बदलाव लाने में सफल नहीं हो सकते जब तक इंसान व् समाज खुद अंदर से इसके लिए तैयार ना हो| भीतर से आए परिवर्तन द्वारा ही समाज में उजली किरणों का प्रवेश संभव है| यह परिवर्तन की अभिलाषा और इस दिशा में पुरुषार्थ आज के समय की माँग है| सर्व श्री आशुतोष महाराज जी इस चाह को जगाकर अनेकों जीवन परिवर्तित कर रहे हैं| श्रद्धालुओं का आह्वान किया गया कि वे भी इस सुंदर मुहीम का सक्रिय अंग बनें| आंतरिक जागरण ही मानव से लेकर विश्व तक के स्तर की हर समस्या को मिटा सकता है| समाज में बढ़ती अशांति के समूल खात्मे के लिए भी पहले हर मानव के भीतर शांति को स्थापित करना होगा| सबका एकजुट प्रयास शान्ति की स्थापना में अहम योगदान देकर धरा की पीड़ा को दूर करेगा| इस कार्यक्रम में श्रद्धालु भारी तादात में शामिल हुए| अंत में सभी ब्रह्मज्ञानी शिष्यों ने सामूहिक ध्यान की सकारात्मक तरंगों से वसुंधरा को संपोषित करते हुए विश्व शांति हेतु प्रार्थना भी की|

Importance of Faith Reiterated at Monthly Spiritual Congregation, Nurmahal, Punjab

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