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10 मई 2026 को नूरमहल, पंजाब में आयोजित मासिक आध्यात्मिक सत्संग कार्यक्रम भक्तों के लिए परिवर्तनकारी आयोजन रहा। दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान) की असीम कृपा से, इस कार्यक्रम का संचालन डीजेजेएस द्वारा किया गया, जो निष्काम भाव से मानवता के उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। यह आयोजन मात्र एक सभा नहीं थी, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव था जिसने भक्तों में दिव्य ऊर्जा, सकारात्मकता और आंतरिक जागरण के मार्ग पर चलने के एक नए संकल्प का संचार किया।

‘Know thyself’- The true mantra of spirituality, beautifully elucidated in the Monthly Spiritual Congregation held at Nurmahal, Punjab

डीजेजेएस प्रतिनिधियों ने अपने प्रवचनों में समझाया कि इस मानव जन्म का उद्देश्य आत्म-साक्षात्कार (स्वयं को जानना) है। हमारे शास्त्रों के अनुसार, एक ही परमात्मा का अस्तित्व है, जो सर्वव्यापी है। कुछ लोग, अविवेक के कारण, यह मानते हैं कि जिस प्रकार किसी भौतिक गंतव्य तक पहुँचने के अलग-अलग मार्ग होते हैं, उसी प्रकार ईश्वर को प्राप्त करने के भी विभिन्न मार्ग हैं। हालाँकि, जिन्हें अध्यात्म का शाश्वत ज्ञान है, वे ईश्वर को जानने और अनुभव करने के लिए केवल एक ही मार्ग की पुष्टि करते हैं और वह है 'ब्रह्मज्ञान' आधारित ध्यान-साधना! जब कोई ब्रह्मज्ञानी साधक अपने अंतर्जगत की गहराई में उतरता है, तब वह स्वयं की चेतना में स्थित हो आंतरिक आनंद अर्थात परम आनंद को प्राप्त करता है।

एक बार जब कोई साधक इस अवस्था का अनुभव कर लेता है, तो वह अपनी खुशी को रोक नहीं पाता और पूरी दुनिया को इसके बारे में बताने के लिए विवश हो जाता है। जैसा कि विट्ठल भक्त नामदेव जी ने कहा था- 'जब देखा तब गावा’, जिसका अर्थ है, "जब मैंने (साक्षात्कार) देखा, तो मैं गाए (गुणगान किए) बिना नहीं रह सका।" भगवान बुद्ध का जीवन भी इसी बात पर प्रकाश डालता है। उन्होंने ज्ञान की खोज में विलासिता का त्याग कर दिया था, लेकिन जब उन्होंने अपनी आत्मा के उद्देश्य को खोज लिया, तो वे स्वयं को रोक नहीं पाए और इस दिव्य ज्ञान को आम लोगों के साथ साझा करने के लिए पुनः संसार में लौट आए।

‘Know thyself’- The true mantra of spirituality, beautifully elucidated in the Monthly Spiritual Congregation held at Nurmahal, Punjab

वर्तमान समय में भी विश्व इसी सत्य का साक्षी बन रहा है। लाखों ब्रह्मज्ञानी साधक (गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज  जी के अनुयायी) विश्व भर में निस्वार्थ सेवा में लगे हुए हैं और समर्पित भाव से जन-जन तक ब्रह्मज्ञान का संदेश पहुँचा रहे हैं। इन स्वयंसेवकों ने अपने जीवन के वास्तविक उद्देश्य को खोज लिया है और वे अब सबके जीवन को रूपांतरित कर रहे हैं। इस अलौकिक समागम का समापन सारगर्भित प्रवचनों, सामूहिक ध्यान, विश्व शांति के लिए प्रार्थना और सभी के लिए सामूहिक भोज (भंडारे) के साथ हुआ। जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को विवेकशील बन अपने जीवन के परम उद्देश्य "स्वयं को जानो" को गहराई से समझने और इसको प्राप्त करने की दिशा में प्रयासरत होने के लिए प्रेरित किया।

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