देवी दुर्गा शक्ति की सर्वोच्च प्रतीक रूप में हमें जीवन को श्रेष्ठता की ओर अग्रसर करने हेतु प्रेरित करती हैं। उसके नौ रूप पवित्रता, ज्ञान, सत्य, आत्मबोध, मोक्ष और त्याग के प्रतीक हैं। माँ दुर्गा अपने हर रूप द्वारा ब्रह्मज्ञान का संबल प्राप्त कर जीवन में पवित्रता की ओर उन्मुख करती हैं। उदाहरण के लिए, देवी माँ के हाथ में अर्द्ध खिला कमल सफलता की निश्चितता का प्रतीक है, जो वासना रूपी सांसारिक कीचड़ के बीच भी भक्तों के आध्यात्मिक गुणों के निरंतर विकास को दर्शाता है।
मानव इस संसार में आकार अपने वास्तविक लक्ष्य से अनभिज्ञ हो, सांसारिक सुखों में लिप्त हो जाता है। जीवन के उद्देश्य के प्रति जागरूक करने हेतु दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने 14 जनवरी, 2019 को रैय्या, जिला अमृतसर, पंजाब में “माँ भगवती जागरण” का आयोजन किया। “जागरण” शब्द का अर्थ है जागना, अर्थात मोह रूपी रात्रि में ज्ञान द्वारा जागृत हो जाना। मानव में अंतर्निहित दिव्य प्रकाश रूपी शक्ति का अनुभव हो जाने पर स्वतः ही सभी नकारात्मकताएं समाप्त होने लगती हैं और व्यक्ति सत्य का प्रतिरूप बन जाता है।
कार्यक्रम का आरम्भ माँ भगवती के चरण कमलों में विनम्र प्रार्थना के साथ हुआ, तदुपरांत मधुर भक्तिमय भजनों की श्रृंखला ने वातावरण में दिव्यता का संचार किया। सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी मंगलावती भारती जी ने अपने विचारों के माध्यम से बताया कि जीवन में जागरण तभी संभव हो पाता है, जब हम हृदय से इसके अर्थ पर चिंतन करते है। यूँ तो हमने संसार में सभी विलासिता के साधनों को एकत्र कर लिया है, परन्तु जिस आनंद की अभिलाषा हमें है वह मात्र अध्यात्म द्वारा ही संभव है। मात्र ब्रह्मज्ञान ही अज्ञान को समाप्त करते हुए, मानव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में सक्षम है।
साध्वी जी ने बताया कि आत्मा-साक्षात्कार के अभाव में मात्र शब्दों से आत्म-जाग्रति संभव नहीं। जिस प्रकार एक बंद कमरे में मात्र सूर्य के विषय पर चर्चाएँ करते हुए उससे लाभान्वित नहीं हो सकते। सूर्य को देखने व लाभ लेने हेतु आपको खुले आकाश के नीचे जाना होगा। उसी तरह मात्र आध्यात्मिकता के विषय में चर्चाएँ करने से एक भक्त लाभान्वित नहीं हो सकता। आध्यात्मिकता को पाने हेतु एक पूर्ण सतगुरु के सान्निध्य में जाना होगा। सच्चे गुरु के अभाव में भीतर का जागरण संभव नहीं है। परम पूजनीय सर्व श्री आशुतोष महाराज जी भक्तों को “ब्रह्मज्ञान” के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार के शाश्वत विज्ञान से परिचित करवा, दिव्य शक्ति संचार को जाग्रति करते हैं जिसके द्वारा दिव्य व्यक्तित्व का निर्माण आरम्भ होता है। यही दिव्य व्यक्तित्व समाज उत्थान हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
साध्वी जी ने आध्यात्मिक प्रवचनों द्वारा व्यक्ति को जीवन में निःस्वार्थ सेवा के महत्व व ध्यान द्वारा नकारात्मकता को समाप्त कर जीवन में पूर्ण परिवर्तन का सूत्र प्रदान किया। श्रद्धालुओं ने प्रवचनों और भक्ति गीतों के माध्यम से प्रसारित दिव्य संदेश को समझते हुए, ब्रह्मज्ञान प्राप्ति द्वारा आध्यात्मिकता के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
