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साधकों के आध्यात्मिक विकास एवं परमात्मा से आंतरिक संबंध को और प्रगाड़ करने के उद्देश्य से, 'दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान' (डी.जे.जे.एस) द्वारा रियासी, जम्मू और कश्मीर में 16 अक्टूबर 2025 को 'माता की चौकी' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक और संचालक, डीजेजेएस) की दिव्य अनुकंपा से आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देने वाला कार्यक्रम आयोजित किया गया। भावपूर्ण संगीत और मधुर प्रस्तुतियों ने भक्तों और अनुयायियों के लिए श्रद्धा और आध्यात्मिक आनंद का माहौल बनाया, जो भक्ति एवं ज्ञान का अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए।

Mata Ki Chowki organized by DJJS at Jammu & Kashmir served as a sacred pathway to Eternal Devotion and Spiritual Enlightenment

डी.जे.जे.एस प्रतिनिधि, साध्वी मंगलावती भारती जी ने देवी शक्ति और आंतरिक ब्रह्मांडीय जगत के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। उन्होंने कहा कि माँ भगवती शक्ति और करुणा का प्रतीक हैं, जो नारी सशक्तिकरण के लिए एक आदर्श रूप में कार्य करती है। वह एक दिव्य ऊर्जा हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निवास करती हैं और जिसे सर्वोच्च आध्यात्मिक पद्दतियों के माध्यम से ही महसूस किया जा सकता है।

साध्वी जी ने प्रसन्नतापूर्वक इस बात पर भी प्रकाश डाला कि माँ जगदम्बा प्रत्येक स्त्री में उन दिव्य शक्तियों का प्रतिनिधित्व करतीं हैं, जो सृजन और प्रलय... दोनों ही अवस्थायों में आवश्यक है। माता की पूजा करना ब्रह्मांडीय संतुलन में स्त्री ऊर्जा की भूमिका को स्वीकार करता है।

Mata Ki Chowki organized by DJJS at Jammu & Kashmir served as a sacred pathway to Eternal Devotion and Spiritual Enlightenment

डी.जे.जे.एस प्रतिनिधि ने स्त्री को अपनी आंतरिक क्षमता को जगाने और दिव्य शक्ति से जुड़ने के लिए एक परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में ‘ध्यान’ के महत्व को समझाया। 'ब्रह्मज्ञान' आधारित ध्यान के माध्यम से व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव कर सकता है। भक्ति, चिंतन और दिव्य ज्ञान की खोज के माध्यम से, भक्त माता की परिवर्तनकारी शक्ति को अपना सकते हैं और आध्यात्मिक विकास और आत्म-प्राप्ति के मार्ग पर चल सकते हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि 'ब्रह्मज्ञान' साधक के भीतर एक व्यापक परिवर्तन की शुरुआत करता है, अलगाव को दूर करता है और अंतर्निहित एकता को प्रकट करता है। ध्यान के माध्यम से, साधकों को अपनी दिव्य प्रकृति और शक्ति के साथ अंतर्संबंध का एहसास होता है।

'माता की चौकी', आध्यात्मिक आत्मनिरीक्षण और सामूहिक पूजा के लिए एक पवित्र मंच के रूप में कार्य करती है। दिव्य ज्ञान के कुंड में खुद को डुबो कर, भक्त आत्म-साक्षात्कार और आत्मज्ञान के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए अपनी आध्यात्मिक यात्रा को ओर गहरा करते हैं।

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