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12 फरवरी को पंजाब, नूरमहल आश्रम में विशाल स्तरीय सत्संग कार्यक्रम व् भंडारे का आयोजन रहा| इस अवसर पर संत समाज ने सुन्दर व् प्रेरणादायक सुमधुर भजनों का गायन किया| विश्व शांति के मूल मंत्र ब्रह्मज्ञान के विषय पर सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य व् शिष्याओं ने अपने विचारों को रखा| उन्होंने बताया की मात्र ब्रह्मज्ञान द्वारा ही मानव की सद्वृतियों को जागृत किया जा सकता है| विश्व में शांति स्थापना हेतु अनेक क्रांतियों का आरम्भ हुआ परन्तु अंत में वह स्वयं ही अनेक समस्याओं की जननी बन गयी| यदि वास्तव में विश्व को शांत करना है तो मात्र एक ही मार्ग है- ब्रह्मज्ञान| इस कार्यक्रम में भारी संख्या में ब्रह्मज्ञानी साधक उपस्थित हुए| उपस्थित ब्रह्मज्ञानी साधकों ने ध्यान द्वारा विश्व शांति हेतु प्रार्थना भी की|

Monthly Spiritual Congregation Energized the Masses to Fulfill their Spiritual Goals at Nurmahal Ashram, Punjab

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