आत्म-साक्षात्कार व आध्यात्मिक जागृति के प्राचीन व सनातन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने हेतु भगवान बुद्ध के जीवन व शिक्षाओं को उजागर करते हुए ‘दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान’ द्वारा 28 जनवरी 2025 को महाकुंभ, प्रयागराज में ‘महाबुद्ध अवतरण’ नामक एक अद्भुत नाट्य प्रस्तुत किया गया। ‘नाट्योत्सव- थिएट्रिकल एक्सक्लूसिव’ के अंतर्गत ‘सनातन समाधि विज्ञान’ के विषय पर आधारित ‘दिव्य ज्योति चलचित्रम शृंखला 3’ द्वारा महात्मा बुद्ध की राजकुमार से आध्यात्मिक गुरु की परिवर्तनकारी यात्रा को अभिव्यंजक रूप से दर्शाया गया। इस दिव्य प्रस्तुति ने व इससे प्राप्त होने वाली दिव्य प्रेरणाओं ने विश्व भर से पधारे संतों, विद्वानों, भक्तों, जिज्ञासुओं व विविध पृष्ठभूमि के दर्शकों को सिरे से अभीभूत कर दिया|

आध्यात्मिक अनुभूति के मार्ग में ‘समाधि’ के महत्व को उजागर करते हुए डीजेजेएस की प्रचारक साध्वी दीपा भारती जी ने आध्यात्मिक नाटक का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि यह केवल एक जीवन चित्रण नहीं है, अपितु ‘सनातन समाधि विज्ञान’ का गहन अन्वेषण है, जो दिव्य चेतना, आंतरिक अनुशासन व साधना पर आधारित एक सनातन आध्यात्मिक विज्ञान है। नाटक में भगवान बुद्ध के जीवन व शिक्षाओं को चित्रित करते हुए उनकी राजकुमार से आत्मज्ञान तक की परिवर्तनकारी यात्रा का सुंदर प्रस्तुतीकरण किया गया। नाटक ने नाटकीय अभिव्यक्ति, विचारोत्तेजक संवादों व आध्यात्मिकता से सराबोर दृश्यों के संगम के माध्यम से आत्म-अन्वेषण, त्याग व करुणा के कालातीत सिद्धांतों को उजागर किया। डीजेजेएस के निःस्वार्थ कार्यकर्ताओं द्वारा सिद्धार्थ गौतम के संघर्षों व अनुभवों, उनके सांसारिक मोह-माया से प्रस्थान, उनकी गहन ध्यान संबंधी खोज व ज्ञान प्राप्ति के अंतिम क्षणों को उत्कृष्टतापूर्वक प्रदर्शित किया गया।
डीजेजेएस की अन्य प्रचारक साध्वी तपेश्वरी भारती जी ने ‘समाधि विज्ञान’ व ‘ब्रह्मज्ञान’ के बीच गहरा संबंध बताते हुए विषय को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने समझाया कि ‘ब्रह्मज्ञान’ द्वारा आत्म-साक्षात्कार कर एक व्यक्ति ‘भगवान बुद्ध’ जैसे प्रबुद्ध प्राणियों द्वारा प्राप्त ध्यान की गहन अवस्थाओं का अनुभव करने का अवसर प्राप्त करता है। नाट्य प्रस्तुति के मुख्य संदेश को उजागर करता आध्यात्मिक विज्ञान, व्यक्ति को माया से ऊपर उठाकर शाश्वत सत्य से जोड़ता है।

अंत में साध्वी जी ने समझाया कि नाटक में प्रस्तुत भगवान बुद्ध का चरित्र दुखों को दूर करने व आंतरिक शांति और ज्ञान प्राप्त करने के साधन के रूप में ध्यान की आवश्यकता पर बल देता है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपनी आध्यात्मिक आभा को उत्कृष्ट करने हेतु ‘ब्रह्मज्ञान’ के अलौकिक ज्ञान को अपनाने का सन्देश दिया। नाट्य प्रस्तुति ने मीडिया का अत्यधिक ध्यान आकर्षित करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं की भरपूर सराहना प्राप्त की, जो नाटक की दार्शनिक गूढ़ता व कलात्मक उत्कृष्टता से अत्यंत प्रभावित दिखे। रंगमंच को माध्यम रुप में प्रयोग कर डीजेजेएस ने गूढ़ आध्यात्मिक संदेश को आकर्षक व प्रासंगिक रूप से सफलतापूर्वक व्यक्त करते हुए सुनिश्चित किया कि प्राचीन व सनातन ज्ञान काकेवल स्मरण ही नहीं अपितु उसका प्रत्यक्ष अनुभव भी किया जा सके।