4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के मंथन – संपूर्ण विकास केंद्र द्वारा मासिक रूप से आयोजित की जानेवाली ‘संस्कारशाला’ एक अनोखा प्रयास है, जिसका उद्देश्य है नवांकुर मनों को जीवन के संघर्षों में दिशा देना, और उन्हें सनातन मूल्यों से जोड़तेहुए आत्मबल, संवेदना और विवेक से संपन्न बनाना। यह केवल एक कार्यशाला नहीं, अपितु बाल मनों में नैतिक मूल्यों, जीवन-कौशल और धैर्यकी नींव रखने वाला एक परिवर्तनकारी अभियान है।

मई 2025 में आयोजित संस्कारशाला श्रृंखला का केंद्र बिंदु रहा – क्षमा संस्कारशाला – द्वितीय धर्म लक्षणम्, जिसमें ‘क्षमाशीलता’ जैसे अत्यंतमहत्वपूर्ण धर्मलक्षण पर गहन चिंतन कराया गया। यह केवल एक भाव नहीं, अपितु आंतरिक शांति, आत्म-संयम और नैतिक स्पष्टता की परिपक्वअभिव्यक्ति है।
देश-विदेश में फैले संस्थान के विभिन्न केंद्रों पर इस माह कुल 58 संस्कारशालाओं का आयोजन हुआ, जिनमें लगभग 6700 बालक-बालिकाओंने भाग लिया। इनमें भारत के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ तथा NRI बच्चे भी सम्मिलित थे।

उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से –
● राजकीय बाल गृह (शिशु), मेरठ
● श्री जी संस्कार पब्लिक स्कूल, नोएडा में यह कार्यशालाएं सम्पन्न हुईं।
इन सत्रों में मंथन - सम्पूर्ण विकास केंद्र के कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को क्षमा के मूल्य से परिचित कराया गया—जिसे धर्म का द्वितीय लक्षण कहागया है। संवादात्मक चर्चाओं, शिक्षाप्रद कहानियों और अभिनय-आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने सीखा कि— जब कोई उन्हें धक्कादे या मारे तो क्रोध की प्रतिक्रिया से पहले क्षमा की समझ कैसी हो, खेल में यदि कोई बच्चा वस्तुओं से टकरा जाए, तो दया का भाव कैसा हो व यदि कोई उनका उपहास करे या किसी और को हँसी का पात्र बनाए, तो वे किस भाव से वे प्रतिक्रिया दें। सत्रों ने बच्चों को उनके स्वयं के व्यवहारपर आत्मचिंतन करने का अवसर दिया— जैसे कभी खिलौने साझा न करना, कठोर भाषा का प्रयोग करना, या समूह की मर्यादा भंग करना।
इन सत्रों का मूल उद्देश्य था—बच्चों के मन में संवेदनशीलता, धैर्य और नैतिक साहस का बीजारोपण करना। क्षमा की भावना को आत्मसात करबच्चों ने सीखा कि कैसे— प्रतिक्रिया की जगह दया को चुना जाए, चोट के बदले चिकित्सा को अपनाया जाए एवं आवेग की जगह धैर्य रोपितकिया जाए। और इन्ही मूल्यवान संदेशों के साथ सभी संस्कारशालाओं का समापन शांति मंत्र व दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के चरणों मेंश्रद्धा-सम्मत वंदन अर्पित कर किया।
