दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की समग्र शिक्षा पहल मंथन संपूर्ण विकास केंद्र द्वारा 4 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों हेतु प्रतिमाह आयोजित की जाने वाली विशेष कार्यशाला संस्कारशाला अपने आप में एक अद्वितीय पहल है। यह मंच बालमन को संस्कारित करते हुए उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाता है तथा सनातन मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा प्रदान करता है। संस्कारशाला 2025 के सफल समापन एवं लाभार्थी बच्चों के प्रमाणन हेतु “संस्कार्निवल - बचपन का पर्व, भारत का गर्व 2026” का आयोजन किया गया।

संस्कार्निवल का उद्देश्य बाल प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना था, जहाँ वे अपनी विशिष्ट क्षमताओं, सृजनात्मक दृष्टि एवं भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से अपने गहरे जुड़ाव को अभिव्यक्त कर सकें।
फरवरी 2026 में संस्कार्निवल का आयोजन राष्ट्रव्यापी स्तर पर किया गया, जिसके माध्यम से DJJS की विभिन्न शाखाओं, NRI प्रतिभागियों एवं देशभर के विविध विद्यालयों से जुड़े लगभग हज़ार बच्चों तक इसकी पहुँच बनी।

संस्कार्निवल, संस्कारशाला की गत वर्ष की शिक्षाओं, अनुभवों एवं मूल्यों का एक सुसंस्कृत उत्सव बनकर उभरा। कार्यक्रम का शुभारंभ मधुर मंगलाचरण के साथ हुआ, जिसने वातावरण को शांति एवं प्रेरणा से ओतप्रोत कर दिया। संरक्षण, संतुलन, बोध, अंतर्क्रांति, अंतर्दृष्टि एवं साहित्य जैसे विषयों से प्रेरित प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक गहराई एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
बाल प्रतिभागियों ने अपनी मनोहारी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा में भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ, सामूहिक नृत्य, संगीत प्रदर्शन एवं समवेत सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों ने सृजनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रभावशाली परिचय दिया। वहीं पहेलियों, कलात्मक अभिव्यक्तियों, भाषाई खेलों एवं बौद्धिक गतिविधियों जैसी सहभागितापूर्ण प्रस्तुतियों ने बच्चों की अंतर्निहित प्रतिभा को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान किया।
सत्रों में समकालीन विषयों- जैसे संगति का प्रभाव, भावनात्मक सुदृढ़ता एवं दृष्टिकोण जागरूकता- पर आधारित चिंतनशील चर्चाएँ एवं कथानक-आधारित शिक्षण अनुभव भी सम्मिलित रहे, जिन्होंने बच्चों के समग्र विकास को एक सुदृढ़ दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों द्वारा साझा किए गए अनुभवों ने इस पहल के सकारात्मक एवं परिवर्तनकारी प्रभाव को हृदयस्पर्शी रूप में अभिव्यक्त किया। प्रमाणपत्र वितरण ने समारोह को उत्सवमय गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के समापन के साथ यह संदेश पुनः सशक्त हुआ कि उत्कृष्टता के साथ संस्कारों का संवर्धन ही भावी पीढ़ी के उज्ज्वल निर्माण का वास्तविक आधार है।
