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संस्कारशाला, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के समग्र शिक्षा प्रकल्प मंथन-सम्पूर्ण विकास केन्द्र (SVK) द्वारा एक विशेष मासिक पहल है, जो 4 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों को संस्करों से पोषित कर रहा है। यह पहल बाल मन व मस्तिष्क को शाश्वत गुणों और भावनात्मक दृढ़ता से आकार देने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है। इन सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षा और मूल्य-आधारित शिक्षा का समावेश किया जाता है।

Sanskarshala Promotes Values and Holistic Growth - DJJS Manthan SVK | March 2026

मार्च 2026 के दौरान, संस्कारशाला के विषयों को बहुआयामी अवधारणाओं से जोड़ने हुए बड़ी सावधानीपूर्वक तैयार किया गया था, जिससे एक परिष्कृत और गहन शिक्षण अनुभव प्राप्त हो सके। संस्कारशालाओं में विवेक, चरित्र और सचेत चिंतन के विकास पर जोर दिया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि छात्र सतही ज्ञान से परे जाकर गहन चिंतन एवं संस्कारों से स्वयं को पोषित करें। सिद्धांतों को व्यावहारिक अनुप्रयोग से जोड़कर, प्रतिभागियों को आदर्शों को आत्मसात करने और उन्हें दैनिक व्यवहार में प्रतिबिंबित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सत्रों ने ईमानदारी, जवाबदेही और निर्णय लेने के प्रति संयमित दृष्टिकोण के विकास में सहयोग दिया, जिससे सर्वांगीण व्यक्तिगत विकास में योगदान मिला।

मार्च 2026 में, कुल 38 संस्कारशाला कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे DJJS की सभी शाखाओं में लगभग 1535 बच्चों को लाभ हुआ, जिनमें NRI बच्चे और देश भर के विभिन्न स्कूलों के छात्र शामिल थे।

Sanskarshala Promotes Values and Holistic Growth - DJJS Manthan SVK | March 2026

पूरे माह के दौरान संस्कारशाला एक सशक्त प्रयास के रूप में उभरी, जहाँ मंथन SVK के volunteers द्वारा सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली सत्र संचालित किये गए। प्रत्येक सत्र में विविध विषयों का समावेश करते हुए मूल्याधारित अधिगम तथा समग्र विकास को प्रोत्साहित किया गया। विशेष रूप से विकसित दृश्य सामग्री एवं प्रभावशाली उद्बोधन के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला, जिससे उनमें समालोचनात्मक चिंतन तथा उच्च मूल्यों के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता का विकास हुआ। संरचित अभ्यासों ने भावनात्मक संतुलन, एकाग्रता तथा विवेकपूर्ण निर्णय-क्षमता को भी सुदृढ़ किया।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विद्यार्थियों में जागरूकता, उत्तरदायित्व तथा गरिमापूर्ण आचरण का विकास हुआ, और संस्कारशाला एक ऐसे सशक्त मंच के रूप में निरंतर कार्य करती रही जो मूल्यनिष्ठ एवं विवेकशील व्यक्तित्वों का निर्माण करती है। सत्र की समाप्ति शांतिमंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुई। सभी ने दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पवित्र कमल चरणों में अपना विनम्र प्रार्थना रुपी नमन अर्पित किया।

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