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गुरौ न प्राप्यते यत्तन्नान्यत्रापि हि लभ्यते। गुरुप्रसादात सर्वं तु प्राप्नोत्येव न संशयः।।

Shri Guru Purnima Mahotsav 2023 at Divya Jyoti Jagrati Sansthan's Nurmahal Ashram, Punjab drenched the Disciples in the fervor of Emotions

जो ज्ञान और विवेक गुरु से प्राप्त नहीं किया, वह और कहीं से भी प्राप्त नहीं किया जा सकता। निःसंदेह गुरु की कृपा से व्यक्ति इस संसार में कुछ भी प्राप्त कर सकता है| -श्रीमद भगवत गीता

एक शिष्य और उसके आध्यात्मिक गुरु के बीच का पावन सम्बन्ध शाश्वत और आलौकिक होता है जिसे शब्दों में वर्णित कर पाना कठिन है। गुरु-शिष्य के इस पवित्र संबंध को मनाने हेतु, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा 3 जुलाई, 2023 को नूरमहल आश्रम, पंजाब में "श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव 2023" का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में माननीय रक्षा मंत्री, भारत सरकार श्री राजनाथ सिंह जी व विशिष्ट अतिथि श्री विजय सांपला, माननीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार और कई अन्य सम्मानित अतिथि  भी उपस्थित रहे। यह पर्व एक शिष्य के जीवन में विशेष महत्व रखता है। इसलिए इस पावन दिवस, लाखों की संख्या में भक्त सतगुरु के चरण कमलों में अपनी भावभीनी भावनाएं व प्रार्थनाएं अर्पित करने पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी (संस्थापक एवं संचालक, डीजेजेएस) की मंगल आरती एवं पूजन से हुई। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। हर भक्त-हृदय गुरुदेव की दिव्य स्मृतियों व कृपाओं से सराबोर हो गया। गुरुदेव के संगीतज्ञ प्रचारक शिष्य व शिष्याओं ने भक्तिमय दिव्य भजनों व रचनाओं के द्वारा सम्पूर्ण वातावरण को समर्पण और भावनाओं के विद्युतीय स्पंदनों से भर दिया।

Shri Guru Purnima Mahotsav 2023 at Divya Jyoti Jagrati Sansthan's Nurmahal Ashram, Punjab drenched the Disciples in the fervor of Emotions

कलत्रं धनं पुत्रपौत्रादि सर्वं । गृहं बान्धवाः सर्वमेतद्धि जातम् ।।
मनश्चेन्न लग्नं गुरोरंघ्रिपद्मे । ततः किं ततः किं ततः किं ततः किम् ।।२।।  आदि शंकराचार्य (गुरु अष्टकम)

 

 

 

 

 

 

 

 

गुरुदेव के प्रचारक शिष्यों ने शास्त्रों से कई महान उदाहरणों के साथ गुरु-शिष्य संबंध को बड़ी खूबसूरती से समझाया। गुरु अपने शिष्य को जागृति के अपने स्तर तक ऊपर उठाता है। इस सम्पूर्ण विश्व में अपने शिष्य के कल्याण की चिंता करने वाला आध्यात्मिक गुरु के अतिरिक्त कोई अन्य नहीं है। वे अपने निरंतर प्रयासों से अपने शिष्य के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते रहते हैं जिससे वह शिष्य ईश्वर के साथ एकरूप हो सकें| और इस प्रकार वे अपने शिष्य को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान उदाहरण बनाते हैं। दूसरी ओर, एक सच्चा शिष्य भी अपने गुरु और उनके मिशन के प्रति कटिबद्ध होता है। वह अपने गुरु की आज्ञा को पूरा करने के लिए अपना सब कुछ अर्पित करता है, क्योंकि वह भली प्रकार जानता है कि उसका गुरु जो कुछ भी करेगा, वह उस शिष्य के लाभ के लिए ही होगा। इसलिए अक्सर कहा जाता है कि जिसने जीवन में पूर्ण गुरु का सान्निध्य प्राप्त कर लिया है, उसके लिए और कुछ भी प्राप्त करना शेष नहीं रह जाता और जिसने संसार में सब कुछ प्राप्त कर लिया है, लेकिन सतगुरु को प्राप्त नहीं किया, वास्तव में उसने कुछ भी हासिल नहीं किया है। आदि शंकराचार्य ने भी कहा था –

कलत्रं धनं पुत्रपौत्रादि सर्वं । गृहं बान्धवाः सर्वमेतद्धि जातम् ।।
मनश्चेन्न लग्नं गुरोरंघ्रिपद्मे । ततः किं ततः किं ततः किं ततः किम् ।।२।।

मनुष्य के पास पत्नी, धन, पुत्र, पौत्र, बड़ा घर, सगे सम्बन्धी और अच्छा कुल हो सकता है। लेकिन यदि उसका मन अपने गुरु के चरण कमलों पर केंद्रित नहीं है, तो सब व्यर्थ है, व्यर्थ है, व्यर्थ है) आदि शंकराचार्य (गुरु अष्टकम)

 

 

 

 

 

 

 

गुरु-शिष्य संबंध को विश्व में सर्वोच्च माना गया है, क्योंकि यह बिना शर्त प्रेम और समर्पण पर आधारित है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ने अपने असंख्य शिष्यों को ऐसा ही दिव्य सानिध्य प्रदान कर उनके जीवन को पूर्ण रूप से बदल दिया है। श्रीयुक्तेश्वर जी ने एकदा अपने शिष्य परमहंस योगानन्द से कहा था: “मैं अब से अनंत काल तक तुम्हारा मित्र बनकर रहूँगा, चाहे तुम निम्नतम मानसिक तल पर हो या ज्ञान के उच्चतम ऊंचाई पर। यदि तुम गलती भी करोगे तो भी मैं तुम्हारा मित्र रहूंगा, क्योंकि तब तुम्हें मेरी मित्रता की आवश्यकता किसी अन्य समय से अधिक होगी। क्या तुम भी बिना शर्त वैसा ही प्यार मुझसे करोगे?” परमहंस योगानंद ने उत्तर दिया: "मैं आपको अनंत काल तक प्यार करूंगा, गुरुदेव!" और उन्होंने न केवल इसे कहा, बल्कि इसे जीवन भर जिया। यही सच्ची भक्ति का स्तर है।

आज प्रश्न यह है कि क्या हम भी उसी स्तर की भावना और भक्ति लेकर चलते हैं? ये गुरु पूजा का पावन दिवस सभी शिष्यों को अपने हृदय में झाँकने और अपनी गुरु-भक्ति के स्तर की जाँच करने के लिए मजबूर कर रहा है कि हम सब कहाँ खड़े हैं| जिससे समय के हाथ से फिसलने से पहले ही आवश्यक परिवर्तन किये जा सकें।

कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाई, जिनमें श्री रणदीप सिंह सुरजेवाला (राज्य सभा सदस्य एवं महासचिव व प्रभारी, संचार विभाग आल इंडिया कॉंग्रेस कमेटी), श्री दिनेश (राष्ट्रीय संरक्षक, विश्व हिन्दू परिषद्), श्री प्रदीप जोशी (अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख, RSS), श्री मंथरी श्रीनिवासुलु (संगठन महामंत्री भाजपा, पंजाब एवं चंडीगढ़), श्री इकबाल सिंह (प्रांत संघचालक, पंजाब), श्री ब्रह्म शंकर जिम्पा (कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार), डा. बलजीत कौर (कैबिनेट मंत्री, पंजाब सरकार), श्री मनीष तिवारी (MP), श्री आनंदपुर साहिब (पूर्व केन्द्रीय मंत्री), श्री सुशील कुमार रिंकू (MP जालंधर), महारानी परीनीत कौर (MP पटियाला), श्री गुरजीत सिंह औजला (MP अमृतसर), श्री रवनीत सिंह बिट्टू (MP लुधियाना), प्रोफेसर डॉ सिकंदर कुमार (MP, हिमाचल प्रदेश), सरदार मनिन्दरजीत सिंह बिट्टा (President, All India Anti-Terrorist Front), श्रीमति अनीता सोम प्रकाश (धमर्पत्नी सोम प्रकाश जी MOS भारत सरकार), श्री चरणजीत सिंह (पूर्व डिप्टी स्पीकर पंजाब), श्री ब्रह्म महिंद्रा (पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब), श्री भारत भूषण आशु (पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब), श्री बलबीर सिंह सिद्धू (पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब), श्री अनिल जोशी (पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब), श्री हरजोत कमल (EX. MLA मोगा), श्री पवन कुमार टीनू (EX. MLA, आदमपुर), श्री अरुण नारंग (EX. MLA, अबोहर), श्री केडी भंडारी, (EX. MLA, जालंधर), श्री सरबजीत मक्कड़, (EX. MLA, जालंधर कैंट), श्री संजय तलवार (पूर्व विधायक, काँग्रेस), श्री सुरिंदर सिंह सोढ़ी (EX. MLA) उपस्थित रहे। 

दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के उपस्थित लाखों ब्रह्मज्ञानी शिष्यों ने सामूहिक ध्यान सत्र में भाग लिया तथा वैश्विक कल्याण व विश्व शांति के लिए परमार्थ भाव से प्रार्थना की। साथ ही, सभी शिष्यों ने आध्यात्मिक मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने व गुरुचरणों में अपनी भक्ति को और सुदृढ़ करने के लिए गुरुदेव के आदर्शों व आज्ञाओं को अपने हृदय में धारण किया। अंत में, सामूहिक ध्यान सत्र के बाद सामूहिक भोज के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। अजीत समाचार, उत्तम हिन्दू, दैनिक जागरण, दैनिक सवेरा, पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर, इंडियन एक्सप्रेस आदि जैसे प्रमुख समाचार पत्रों ने भी इस कार्यक्रम को कवरेज किया।

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