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दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) द्वारा दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी के पावन मार्गदर्शन में, 27 दिसंबर 2025 से 02 जनवरी 2026 तक बीकानेर, राजस्थान में श्री कृष्ण कथा का भव्य आयोजन किया गया। इस कथा का वाचन कथा व्यास साध्वी जयंती भारती जी ने किया, जिसे आध्यात्मिक भजनों, श्लोकों और मंत्रोच्चारणों ने और भी समृद्ध कर दिया।

Shri Krishna Katha unfolded the eternal message of Divine knowledge & soul liberation at Bikaner, Rajasthan

भगवान श्री कृष्ण के व्यक्तित्व को अलौकिक चरित्र और ज्ञान के अद्भुत संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें उनके बचपन की नटखट लीलाएँ, तीक्ष्ण कूटनीति और युद्धभूमि में प्रदर्शित शांति एवं धैर्य का सुंदर समावेश था। साध्वी जी ने अनेक प्रसंग सुनाए जिनमें श्री कृष्ण के दिव्य कार्यों में छिपा गूढ़ ज्ञान भक्तों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर प्रकट हुआ। श्री कृष्ण का जीवन विपत्तियों से भरा था, जन्म कारागार में हुआ, जहाँ माता-पिता पीड़ित थे और उनके बड़े भ्राताओं का वध कर दिया गया। शैशवकाल में राक्षसी पूतना से लेकर कालिया नाग तक अनेक परीक्षाएँ सामने आईं; किन्तु उन्होंने हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना किया और विजयी हुए। बाद में कंस का संहार कर उन्होंने शांति और सद्भाव के युग का सूत्रपात किया। साध्वी जी ने कहा कि श्री कृष्ण का जीवन इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य को धर्ममार्ग पर दृढ़ रहना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि कुरुक्षेत्र की रणभूमि में श्री कृष्ण ने अपने प्रिय शिष्य अर्जुन को ब्रह्मज्ञान का शाश्वत उपदेश दिया। उन्होंने उद्घाटित किया कि यह पावन ज्ञान सर्वप्रथम सूर्य को प्रदान किया गया, फिर मनु को, और मनु से इक्ष्वाकु को। तब से यह अखंड परंपरा पूर्ण गुरु से शिष्य तक अविच्छिन्न रूप से प्रवाहित हो रही है। ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर अर्जुन ने हजारों सूर्यों के तेज का दर्शन किया, दिव्य नाद सुने, अमृतरस का स्वाद पाया तथा श्वासों में पवित्र नाम के स्पंदन का अनुभव किया। साध्वी जी ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में भी, यदि हमें ऐसे दिव्य अनुभवों को पाना है और जीवन की हर चुनौती पर विजय पानी है, तो हमें श्री आशुतोष महाराज जी जैसे पूर्ण गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना होगा।

सच्ची ध्यान साधना और निःस्वार्थ सेवा से विवेक शक्ति का विकास होता है, जो जीवन के कठिन निर्णय लेने में सहायक बनती है। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति जीवन का वह मोड़ है जो साधारण मनुष्य को आत्मोन्नत कर निःस्वार्थ व धन्य आत्मा बना देती है। महाराज जी के हजारों शिष्य इस दिव्य ब्रह्मज्ञान की साधना से लाभान्वित होकर सफलता और शांति का जीवन जी रहे हैं तथा विश्वशांति के दिव्य मिशन में अनवरत योगदान दे रहे हैं।

Shri Krishna Katha unfolded the eternal message of Divine knowledge & soul liberation at Bikaner, Rajasthan

कथा में सम्मिलित भक्तों के हृदय प्रेरणा से भर उठे। अनेक लोग ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त करके, ध्यान साधना प्रारंभ करने और निःस्वार्थ सेवा में योगदान देने के लिए प्रेरित हुए। इस प्रकार श्री कृष्ण कथा ने उन साधकों तक पहुँचने के अपने उद्देश्य को सार्थक किया, जो व्यक्तिगत और सामूहिक उत्थान की कामना रखते हैं। कार्यक्रम में कुछ विशिष्ट अतिथियों की भी सहभागिता रही, जिन्होंने संस्थान के प्रयासों की सराहना की और भविष्य में ऐसे आयोजनों में सहयोग देने की अपनी इच्छा व्यक्त की।

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