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भगवान श्रीकृष्ण प्रतीक है असीम करुणा एवं दया के।  यह हम सभी का सौभाग्य है कि हमारा जन्म उस पावन धरती पर हुआ जहाँ भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था। जहाँ आज भी भौतिकवाद से अधिक महत्व नैतिकता एवं आध्यत्मिकता का है। भागवत कथा का उद्देश्य भगवान कृष्ण के जीवन अध्याय के पीछे छिपे गूढ़ रहस्यों को प्रकट करना है जिससे प्रेरणा पाकर प्रत्येक भक्त आध्यात्म के पथ पर निरंतरता से बढ़ सके। भगवद्गीता में निहित नैतिकता और आध्यात्मिकता के तत्व हमें जीवन के मूल को समझने के लिए उपयुक्त मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। भागवत कथा के माध्यम से भगवान द्वारा दिये गये कर्म, ज्ञान एवं भक्ति के सन्देश को समझा जा सकता है। विश्व भर में आयोजित की जाने वाली भागवत कथाओं की शृंखलाओं में एक और कढ़ी को जोड़ते हुए गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के दिव्य सानिध्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा 22 अप्रैल से 28 अप्रैल, 2019 तक ,7 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथाव्यास साध्वी वैष्णवी भारती जी ने इस कथा के माध्यम से आध्यात्म की गहराइयों से अवगत कराया। समधुर भजनों की अनुपम श्रृंखला ने कार्यक्रम में उपस्थित भक्तगणों को मंत्रमुग्ध कर डाला।

Shrimad Bhagwat Katha at Ludhiana, Punjab Proffered the Devotees to Seek the Path of Compassion and Righteousness

साध्वी जी ने कृष्ण लीला के पीछे छिपे दिव्य एवं आध्यात्मिक रहस्यों के बारे में बताया।  उन्होंने समझाया कि भगवद्गीता में निहित संदेशों द्वारा आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने की पहल होती है। आज मानव भौतिकवाद की चकाचौंध में अँधा हो चुका है। इन संसाधनों की पूर्ति की तृष्णा ही उसके दुख का कारण है। वास्तविक सुख इन नश्वर संसाधनों में नहीं अपितु ईश्वर प्राप्ति में है। मन और इन्द्रियों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। आत्मज्ञान द्वारा इंसान इस मोहजाल से निकल प्रभु चरणों से जुड़ सकता है। भगवान श्री कृष्ण द्वारा प्रदत इस ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही अर्जुन का मोह भंग हुआ था। श्री कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि वह इस धरा पर मानव रूप में अवतरित हुए हैं और उनके वास्तविक रूप को केवल ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही जाना जा सकता है।

Shrimad Bhagwat Katha at Ludhiana, Punjab Proffered the Devotees to Seek the Path of Compassion and Righteousness

अंत में साध्वी जी ने समझाया कि भगवान श्री कृष्ण के वास्तविक रूप से जुड़ने के लिए, हमें ईश्वर से निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए कि हमें जीवन में एक पूर्ण सद्गुरु की प्राप्ति हो जो हमें ब्रह्मज्ञान प्रदान कर हमारे दिव्य चक्षु को खोल हमें आध्यात्म के मार्ग की ओर अग्रसर कर सकें।  गुरु शिष्य संबंधों की अनुपम धरोहर को आगे बढ़ाते हुए गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज श्री आज जन जन को इस ब्रह्मज्ञान से परिपोषित कर रहे हैं। आध्यत्मिक रूप से जागृत व्यक्ति, सदैव मानसिक, शारीरिक एवं बौद्धिक रूप से भी सशक्त होता है।  उपस्थित भक्तजनों ने इस कथा का पूर्ण आनंद उठाया एवं भक्ति के इस अनूठे मार्ग पर बढ़ने का संकल्प भी लिया।

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