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असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्येते।।

श्री भगवान् बोले- हे महाबाहो! निःसंदेह मन चंचल और कठिनता से वश में होने वाला है लेकिन हे कुंतीपुत्र! उसे अभ्यास और वैराग्य से वश में किया जा सकता है । (भगवत-गीता, 6:35)

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान, श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा स्थापित एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी और एक अग्रणी आध्यात्मिक संगठन है। हरियाणा के सिरसा में 17 जून से 23 जून 2018 तक श्रीमद्भागवत कथा का सात दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या व आध्यात्मिक वक्ता साध्वी वैष्णवी भारती जी ने कथा के माध्यम से समझाया कि भगवान कृष्ण ने अपने आध्यात्मिक शिक्षक ऋषि संदीपनी से ज्ञान प्राप्त किया। ज्ञान वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति अपने भीतर दिव्यता का अनुभव करता है। इसी दिव्य अनुभव की प्राचीन भारतीय संतों ने ब्रह्मज्ञान के रूप में सराहना की है। ब्रह्मज्ञान मन और बुद्धि को जीतने का स्रोत है।

लोगों को भगवान श्री कृष्ण की शिक्षाओं को समझाने के लिए आज के पूर्ण सतगुरु श्री आशुतोष महाराज जी ब्रह्मज्ञान प्रदान कर रहे हैं और वर्तमान समय में भगवान श्री कृष्ण के दिव्य स्वरूप के सत्य से अवगत करवा रहे हैं। इस कथा ने वर्तमान समय की आवश्यकता ब्रह्मज्ञान द्वारा आत्म जाग्रति की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

जब किसी को अपने जीवन में एक पूर्ण सतगुरु की दिव्य कृपा से ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति होती है तो वह दिव्य यात्रा का पथिक बनता है जहाँ वह सही और गलत के बीच का अंतर समझ पाता है और साथ ही विचारों में सकारात्मकता को भी प्राप्त कर लेता है।

सात दिवसीय कथा के माध्यम से भक्तों ने भगवान कृष्ण के दिव्य जीवन चरित्र से मानव जाति को प्रदत अनेक बहुमूल्य शिक्षा रत्नों को जाना। भक्ति गीतों द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिकता और दिव्यता का अनुभव किया।

The Power of Mind Unveiled at Shrimad Bhagwat Katha at Sirsa, Haryana

The Power of Mind Unveiled at Shrimad Bhagwat Katha at Sirsa, Haryana

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